मध्य प्रदेश की 30 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर निधि तिवारी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जिंदगी और निजी परिस्थितियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर निधि को करीब 16 लाख लोग फॉलो करते थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कॉल रिकॉर्ड समेत परिवार की ओर से सामने रखी गई जानकारियों की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल जांच एजेंसियों ने उनकी मौत की परिस्थितियों और इसके पीछे की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। ऐसे में किसी पोस्ट, बातचीत या निजी विवाद को घटना का कारण मान लेना सही नहीं होगा। यह मामला एक व्यापक सवाल जरूर खड़ा करता है कि लाखों लोगों के सामने लगातार अपनी जिंदगी पेश करने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स किस तरह के दबावों से गुजरते हैं।
सोशल मीडिया पर दिखने वाली जिंदगी हमेशा पूरी कहानी नहीं बताती
किसी इंफ्लुएंसर की प्रोफाइल देखकर उसके निजी जीवन के बारे में पूरी जानकारी हासिल नहीं की जा सकती। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट किसी व्यक्ति की जिंदगी का केवल एक हिस्सा होते हैं। बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होना भी यह साबित नहीं करता कि कोई व्यक्ति निजी तौर पर कैसा महसूस कर रहा है। निधि तिवारी के मामले में भी पुलिस जांच जारी है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनकी स्थिति या घटना के कारण के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
क्रिएटर्स के लिए लगातार सक्रिय और लोगों से जुड़े रहना काम का हिस्सा बन जाता है
इंफ्लुएंसर का काम केवल वीडियो या फोटो पोस्ट करने तक सीमित नहीं रहता। उन्हें नियमित कंटेंट तैयार करना, दर्शकों से बातचीत करना, ब्रांड से जुड़े काम करना और लगातार ऑनलाइन मौजूद रहना पड़ता है। कई मामलों में उनकी निजी पहचान और पेशेवर पहचान आपस में इतनी जुड़ जाती हैं कि काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच दूरी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। दर्शकों की उम्मीदें भी क्रिएटर्स पर लगातार सक्रिय रहने का दबाव बना सकती हैं।
रिसर्च में भी सामने आया है कि ऑनलाइन पहचान के साथ कई तरह के दबाव जुड़े हैं
Journal of Innovation and Entrepreneurship में प्रकाशित एक अध्ययन में इंफ्लुएंसर्स के अनुभवों के आधार पर ऐसे कई दबावों का उल्लेख किया गया है। इसमें कमाई और स्वतंत्रता के बीच संतुलन, वास्तविक दिखने और सार्वजनिक भूमिका निभाने की चुनौती, निजी जीवन को काम से अलग रखने में परेशानी तथा नकारात्मक टिप्पणियों से निपटना शामिल है। हालांकि अध्ययन का सैंपल सीमित था, इसलिए इसके निष्कर्षों को हर सोशल मीडिया क्रिएटर पर लागू नहीं किया जा सकता।
ज्यादा फॉलोअर्स का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति निजी तौर पर भी सुरक्षित और खुश है
फॉलोअर्स, लाइक्स और व्यूज किसी क्रिएटर की ऑनलाइन सफलता का अंदाजा दे सकते हैं, लेकिन ये आंकड़े उसके निजी जीवन की स्थिति नहीं बताते। जिन लोगों की कमाई दर्शकों की सक्रियता पर निर्भर होती है, उनके लिए लंबे समय तक सोशल मीडिया से दूर रहना पहुंच और आय पर असर डाल सकता है। इसके साथ ही लगातार सार्वजनिक निगरानी, टिप्पणियां और निजी जानकारी के फैलने का खतरा भी मौजूद रहता है।
निधि तिवारी मामले में जांच पूरी होने तक सिर्फ प्रमाणित तथ्यों पर भरोसा जरूरी
निधि तिवारी की मौत को लेकर पुलिस की जांच जारी है। परिवार की ओर से कही गई बातों को जांच के दौरान सत्यापित किया जा रहा है, इसलिए उन्हें अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। मीडिया और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए भी जरूरी है कि बिना पुष्टि की जानकारी को आगे न बढ़ाया जाए और किसी अंतिम पोस्ट या कथित बातचीत को घटना की वजह बताकर पेश न किया जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग में सनसनी से बचने और जिम्मेदार तरीके से जानकारी देने की सलाह देता है। इस पूरे मामले से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ऑनलाइन लोकप्रियता को किसी व्यक्ति की निजी स्थिति का पैमाना नहीं माना जा सकता।