भारत ने उत्तर भारत में जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना पर काम तेज किया है। इस परियोजना के तहत चिनाब की सहायक नदी चंद्रा के ऊपरी हिस्से से अतिरिक्त पानी को करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए हिमाचल प्रदेश के ब्यास बेसिन तक पहुंचाने की योजना है। हालांकि इसे सीधे चिनाब नदी को ब्यास से जोड़ने के बजाय चिनाब बेसिन से ब्यास बेसिन में पानी के डायवर्जन के रूप में समझना अधिक सही है। रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना की लागत करीब 2,300 करोड़ रुपये बताई गई है।
भारत चिनाब नदी को व्यास से जोड़ रहा है, क्या है ये प्रोजेक्ट?
इस परियोजना में पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग और अन्य जल ढांचों के जरिए चिनाब बेसिन के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। परियोजना का उद्देश्य उपलब्ध जल का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल करना है। सरकार के स्तर पर चिनाब-ब्यास लिंक से जुड़ी परियोजना को लेकर काम और निविदा प्रक्रिया भी सामने आई है। हालांकि राष्ट्रीय नदी जोड़ो कार्यक्रम के तहत इसे अलग से समझना जरूरी है, क्योंकि सरकार के अनुसार 30 राष्ट्रीय इंटरलिंकिंग परियोजनाओं में अभी केवल केन-बेतवा लिंक परियोजना ही कार्यान्वयन चरण में पहुंची है।
इससे भारत को कैसे फायदा होगा?
चिनाब बेसिन से ब्यास की ओर पानी पहुंचने से हिमाचल और उत्तर भारत में जल संसाधनों के इस्तेमाल की क्षमता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों और रिपोर्टों में इस परियोजना से जल सुरक्षा, सिंचाई और जलविद्युत क्षेत्र में संभावित लाभों का उल्लेख किया गया है। ब्यास बेसिन पहले से ही कई जलविद्युत और सिंचाई परियोजनाओं से जुड़ा है, इसलिए अतिरिक्त पानी का इस्तेमाल भविष्य में इन क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट से जुड़ी नदियों को क्या था सिंधु जल संधि से संबंध?
1960 की सिंधु जल संधि में सतलुज, व्यास और रावी को पूर्वी नदियां तथा सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां माना गया था। भारत को पूर्वी नदियों के पानी के इस्तेमाल का अधिकार दिया गया था, जबकि पश्चिमी नदियों पर भारत के लिए कुछ निर्धारित उपयोग और रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजनाओं की अनुमति थी। हालांकि अप्रैल 2025 से भारत ने संधि को “abeyance” में रखा हुआ है।
भारत के इस प्रोजेक्ट से क्यों है पाकिस्तान परेशान?
पाकिस्तान इस तरह की परियोजनाओं को लेकर चिंता जताता रहा है, क्योंकि चिनाब पश्चिमी नदियों में शामिल है और उसका पानी पाकिस्तान तक पहुंचता है। हालिया बयानों में पाकिस्तान ने भारत पर पानी के प्रवाह को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, भारत का कहना है कि संधि फिलहाल स्थगित स्थिति में है और वह अपने जल संसाधनों के इस्तेमाल को आगे बढ़ा रहा है।
क्या नदी जुड़ने से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान होगा?
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि परियोजना शुरू होते ही पाकिस्तान को निश्चित रूप से भारी पानी की कमी हो जाएगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत को पश्चिमी नदियों से बड़े पैमाने पर अतिरिक्त पानी इस्तेमाल करने के लिए अभी और जलाशयों, नहरों तथा डायवर्जन ढांचे की जरूरत है। इसलिए इसका प्रभाव तत्काल कितना होगा, यह परियोजना के निर्माण, संचालन और वास्तविक जल प्रवाह पर निर्भर करेगा