2026 एशियन गेम्स में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है। तीरंदाजी से लेकर एथलेटिक्स, शूटिंग, क्रिकेट और कबड्डी तक भारतीय महिलाओं ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कंपाउंड तीरंदाजी में ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता थानीपर्थी ने चीन को 238-234 से हराकर महिला टीम का खिताब बरकरार रखा और विश्व व एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी की। वहीं 4×400 मीटर रिले में किरण पहल, पूवम्मा माचेत्तिरा, प्राची और विथ्या रामराज ने 3:29.69 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत गोल्ड जीतकर एक और उपलब्धि अपने नाम की। इन सफलताओं के बीच महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों ने भी स्वर्ण पदक हासिल किए।
तीरंदाजी में चीन को हराकर भारतीय टीम ने रिकॉर्ड की बराबरी कर ली
कंपाउंड तीरंदाजी में भारतीय महिला टीम ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई। ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता थानीपर्थी की टीम ने फाइनल में चीन को 238-234 के अंतर से मात दी। इस जीत के साथ भारत ने महिला कंपाउंड टीम का खिताब बरकरार रखा और विश्व तथा एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली। यह प्रदर्शन भारतीय तीरंदाजी में महिलाओं की निरंतरता को दिखाता है।
4×400 मीटर रिले में भारतीय धाविकाओं ने ट्रैक पर लहराया तिरंगा
एथलेटिक्स में भी भारतीय महिलाओं ने शानदार प्रदर्शन किया। किरण पहल, पूवम्मा माचेत्तिरा, प्राची और विथ्या रामराज की टीम ने महिला 4×400 मीटर रिले में 3:29.69 का समय दर्ज करते हुए गोल्ड मेडल जीता। ट्रैक पर मिली यह सफलता भारतीय एथलेटिक्स के लिए अहम उपलब्धियों में शामिल रही और इसने महिला खिलाड़ियों की क्षमता को एक बार फिर सामने रखा।
नीरू ढांडा के गोल्ड से शूटिंग में भी भारत को मिली बड़ी कामयाबी
महिला ट्रैप शूटिंग में नीरू ढांडा ने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके प्रदर्शन ने एशियन गेम्स में भारतीय महिलाओं की उपलब्धियों की सूची को और मजबूत किया। शूटिंग के साथ-साथ महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों की गोल्ड जीत ने भी यह दिखाया कि भारतीय महिला खिलाड़ी केवल किसी एक खेल तक सीमित नहीं हैं।
बढ़ती सफलता से लड़कियों के बीच खेल को करियर मानने की सोच मजबूत हुई
एक सर्वे में 14 राज्यों के 10,300 से अधिक लोगों को शामिल किया गया था। इसमें 51 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने पिछले छह महीनों में महिला खेल देखा। वहीं 25 साल से कम उम्र की 26 प्रतिशत महिलाओं ने खेल को करियर के तौर पर विचार करने की बात कही। महिला क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता ने भी दर्शकों, निवेश और खिलाड़ियों की पहचान को बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
मेडल के साथ जरूरी है कि ज्यादा लड़कियों को खेल जारी रखने का मौका मिले
महिला खिलाड़ियों की बड़ी जीत के बावजूद जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं। कुछ जगहों पर महिलाओं के खेल को कम महत्व देने और खिलाड़ियों के पहनावे या रूप-रंग पर टिप्पणी करने जैसी सोच अब भी मौजूद है। कई लड़कियां उम्र बढ़ने के साथ समय और दूसरी जिम्मेदारियों के कारण खेल छोड़ देती हैं। National Sports Policy 2025 में महिलाओं की भागीदारी और जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक खेल को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। अब जरूरत इस बात की है कि स्कूलों, समुदायों और प्रशिक्षण केंद्रों में लड़कियों को सुरक्षित सुविधाएं, कोचिंग और पर्याप्त अवसर मिलें, ताकि एशियन गेम्स की ये उपलब्धियां ज्यादा से ज्यादा बेटियों के लिए प्रेरणा और रास्ता बन सकें।