ममता-लेफ्ट में बातचीत: SIR विवाद ने बदले बंगाल के सियासी समीकरण….जानें क्या हुई एक दूसरे के इन विरोधियों के बीच बात

Talks between Mamata and the Left The SIR controversy has altered Bengal political equations find out what transpired between these adversaries

पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से आमने-सामने रहे तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच संवाद की एक नई शुरुआत की खबर सामने आई है। वजह बना है चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठा विवाद। रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी ने CPI(M) महासचिव एम.ए. बेबी से फोन पर बातचीत की और विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की जरूरत पर चर्चा हुई।

1. बंगाल की सियासत में बदला संवाद

TMC और CPI(M) बंगाल की राजनीति में लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। लेकिन मौजूदा विवाद में दोनों पक्षों के बीच संपर्क की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से भी INDIA गठबंधन की बैठक जल्द बुलाने की अपील की है।

2. विवाद के केंद्र में SIR

SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, सॉफ्टवेयर और मतदाता डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं।हालांकि चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा है कि आयोग के अंतिम फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।

3. 13 करोड़ नामों का मुद्दा

SIR प्रक्रिया के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नामों पर कार्रवाई हुई है। यह आंकड़ा विपक्ष की राजनीतिक आपत्तियों का बड़ा आधार बना है, जबकि चुनाव आयोग का तर्क है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करना है।

4. बंगाल में सबसे ज्यादा टकराव

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर विवाद विशेष रूप से सामने आया। चुनाव आयोग के अनुसार SIR के दौरान करीब 27.16 लाख मतदाता हटाए गए, जिनमें से 22 लाख से ज्यादा ने दोबारा नाम शामिल कराने के लिए अपील की है। कुल मिलाकर 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं, जिनमें कुछ नाम जोड़ने और कुछ नाम हटाने से संबंधित हैं।

5. अब INDIA गठबंधन की बैठक पर नजर

ममता बनर्जी और एम.ए. बेबी के बीच बातचीत के बाद विपक्षी दलों की साझा बैठक की मांग फिर चर्चा में है। CPI(M) की तरफ से दूसरे विपक्षी दलों से भी संपर्क किए जाने की रिपोर्ट है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष कितनी साझा रणनीति तैयार कर पाता है।

6. बंगाल से दिल्ली तक सियासी असर

इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बंगाल में परस्पर प्रतिद्वंद्वी रहे TMC और लेफ्ट के बीच बातचीत की खबर राष्ट्रीय स्तर के चुनावी संस्थान से जुड़े विवाद के बीच सामने आई है। इसे फिलहाल मुद्दे-आधारित संवाद के रूप में देखना ज्यादा सटीक है; इससे किसी औपचारिक चुनावी गठजोड़ का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।सियासी तस्वीर साफ है—SIR पर विवाद ने TMC, लेफ्ट और दूसरे विपक्षी दलों के बीच संवाद का रास्ता खोला है। अब असली सवाल यह है कि यह बातचीत सिर्फ चुनाव आयोग के मुद्दे तक सीमित रहती है या आगे किसी व्यापक विपक्षी समन्वय का आधार बनती है।

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