ग्वालियर से दिल्ली तक आशीष अग्रवाल का सफर बैंकिंग छोड़ी, संगठन चुना… 16 साल की मेहनत के बाद राष्ट्रीय मीडिया की कमान

Ashish Agarwal journey from Gwalior to Delhi

ग्वालियर की गलियों से शुरू हुआ एक संगठनात्मक सफर अब दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रबंधन तक पहुंच गया है। नाम है आशीष उषा अग्रवाल। कभी बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने वाले आशीष अग्रवाल ने 2010 में कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर भाजपा संगठन को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। करीब 16 साल बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन इस कहानी में सबसे खास सिर्फ दिल्ली तक पहुंचना नहीं है। असली कहानी है जिम्मेदारियों की वह सीढ़ी, जिसे उन्होंने एक-एक पायदान चढ़कर पार किया। और इस पूरे सफर में एक आंकड़ा खास तौर पर ध्यान खींचता है—37 दिन।

बैंकिंग से भाजपा तक… करियर का सबसे बड़ा मोड़

आशीष अग्रवाल ने 2003 से 2010 तक आईसीआईसीआई बैंक और उसके समूह में अलग-अलग जिम्मेदारियों पर काम किया। यानी उनके सामने कॉरपोरेट करियर का रास्ता खुला हुआ था। लेकिन 2010 में उन्होंने बैंकिंग की नौकरी छोड़कर भाजपा संगठन से जुड़ने का फैसला किया। यहीं से उनके करियर की दिशा बदल गई। ग्वालियर से शुरू हुई संगठनात्मक सक्रियता धीरे-धीरे मीडिया और संचार के मोर्चे तक पहुंची। शुरुआत में यह सफर किसी बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी के साथ नहीं हुआ, बल्कि संगठन के स्थानीय और प्रदेश स्तर के काम से आगे बढ़ा। यानी आज की राष्ट्रीय जिम्मेदारी के पीछे एक दिन, एक चुनाव या एक नियुक्ति नहीं, बल्कि वर्षों का संगठनात्मक अनुभव दिखाई देता है।

2017 से 2026… जिम्मेदारी बढ़ती गई

आशीष अग्रवाल के राजनीतिक सफर को अगर तारीखों में पढ़ें तो तस्वीर और साफ होती है।

2010 में भाजपा संगठन से सक्रिय जुड़ाव।
2017 में मध्यप्रदेश भाजपा के मीडिया पैनल में जगह।
2021 में प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी।
29 अप्रैल 2023 को मध्यप्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी बने।
17 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक।
और फिर 23 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक।

यानी संगठन में उनकी जिम्मेदारी लगातार स्थानीय से प्रदेश और प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ती गई। इस क्रम में एक खास बात यह भी है कि मीडिया उनके लिए केवल बयान देने या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित क्षेत्र नहीं रहा। पार्टी संगठन, सरकार और मीडिया के बीच राजनीतिक संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाना उनके काम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

37 दिन… और राष्ट्रीय टीम में बड़ा बदलाव

अब आते हैं इस पूरी कहानी के सबसे दिलचस्प हिस्से पर। 17 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राष्ट्रीय टीम में नियुक्तियां की थीं। उस समय आशीष अग्रवाल को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक बनाया गया था। लेकिन महज 37 दिन बाद तस्वीर बदल गई। 23 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग में बदलाव हुआ और आशीष अग्रवाल को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दे दी गई। यानी राष्ट्रीय टीम में पहली बार प्रवेश के सिर्फ 37 दिन बाद जिम्मेदारी का दायरा सह-संयोजक से बढ़कर संयोजक हो गया। राजनीतिक संगठन में किसी पद पर पहुंचना एक बात है, लेकिन पद संभालने के कुछ ही सप्ताह बाद उससे बड़ी जिम्मेदारी मिलना अलग संकेत देता है। यह नियुक्ति आशीष अग्रवाल के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा उनके लंबे मीडिया और संगठनात्मक अनुभव के राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल का संकेत मानी जा सकती है।

ग्वालियर मॉडल से दिल्ली के मीडिया मैनेजमेंट तक

आशीष अग्रवाल की कहानी में ग्वालियर सिर्फ जन्मस्थान नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक सफर का शुरुआती आधार भी है। ग्वालियर में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ाव, संगठन के साथ लगातार काम और फिर मीडिया प्रबंधन में सक्रिय भूमिका ने उनकी पहचान को धीरे-धीरे व्यापक बनाया। मध्यप्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में पार्टी के मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालना अपने आप में बड़ा अनुभव है। प्रदेश सरकार, संगठन, विपक्ष, चुनावी मुद्दों और लगातार बदलते राजनीतिक विमर्श के बीच पार्टी का पक्ष मीडिया तक पहुंचाना इस भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। अब यही अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होगा।

राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की भूमिका क्यों अहम?

भाजपा जैसी देशव्यापी राजनीतिक पार्टी में मीडिया विभाग सिर्फ प्रेस रिलीज जारी करने वाला तंत्र नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का राजनीतिक संदेश क्या होगा, किस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष कैसे रखा जाएगा, प्रवक्ताओं और मीडिया के बीच किस तरह समन्वय होगा और राष्ट्रीय मुद्दों पर संगठन की संचार रणनीति कैसे आगे बढ़ेगी—इन सभी क्षेत्रों में मीडिया विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मध्यप्रदेश में लंबे समय तक मीडिया प्रबंधन का अनुभव रखने वाले आशीष अग्रवाल के सामने अब यही काम कहीं बड़े पैमाने पर होगा।

यानी ग्वालियर का अनुभव, भोपाल की राजनीतिक जमीन और अब दिल्ली का राष्ट्रीय मंच।

एक करियर, तीन बड़े मोड़

आशीष अग्रवाल के सफर में तीन बड़े मोड़ साफ दिखाई देते हैं।

पहला—बैंकिंग की नौकरी छोड़कर राजनीति और संगठन को चुनना।

दूसरा—संगठनात्मक भूमिका से मीडिया और संचार के क्षेत्र में अपनी जगह बनाना।

तीसरा—प्रदेश के मीडिया प्रबंधन से सीधे राष्ट्रीय मीडिया नेतृत्व तक पहुंचना।

इन तीनों को जोड़ने वाली कड़ी है—लगातार जिम्मेदारी बढ़ना।

इसलिए आशीष अग्रवाल की कहानी को सिर्फ ‘ग्वालियर के नेता को दिल्ली में पद’ मिलने की कहानी के तौर पर देखना अधूरा होगा। यह कहानी बताती है कि राजनीतिक संगठनों में मीडिया और संचार की भूमिका किस तरह लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है और इस क्षेत्र में लंबे समय से काम करने वाले चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर जगह मिल रही है।

अब ग्वालियर की पहचान राष्ट्रीय मंच पर

आशीष अग्रवाल के सामने अब चुनौती भी बड़ी है और कार्यक्षेत्र भी। मध्यप्रदेश में पार्टी के मीडिया पक्ष को संभालने से लेकर देशभर में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया संवाद की जिम्मेदारी तक का यह सफर सिर्फ भौगोलिक विस्तार नहीं है। यह भूमिका के विस्तार की कहानी है। ग्वालियर से शुरू हुआ सफर 2010 में संगठन तक पहुंचा। 2017 में मीडिया पैनल, 2021 में प्रवक्ता, 2023 में प्रदेश मीडिया प्रभारी, 2026 में राष्ट्रीय सह-संयोजक और फिर सिर्फ 37 दिन बाद राष्ट्रीय मीडिया संयोजक।

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