छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से सामने आई भारतीय विशाल उड़न गिलहरी की मौजूदगी महज दुर्लभ वन्यजीव के कैमरे में कैद होने की घटना नहीं है। इसे जंगल की उस अदृश्य दुनिया की मौजूदगी के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है, जो आमतौर पर इंसानी नजरों से दूर रहती है। उड़न गिलहरी का नाम भले ही गिलहरी हो, लेकिन इसकी जिंदगी का तरीका इसे सामान्य गिलहरियों से बिल्कुल अलग बनाता है। पेड़ों की ऊंची शाखाओं के बीच यह अपनी त्वचा की विशेष झिल्ली का इस्तेमाल कर एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक उड़ने के बजाय ग्लाइड करती है। यही क्षमता इसे जंगल के ऊपरी हिस्से यानी ट्री-कैनोपी की खास प्रजातियों में शामिल करती है।
रात के जंगल का छिपा हुआ किरदार
इस रिकॉर्ड की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उड़न गिलहरी मुख्य रूप से रात्रिचर होती है। दिन में जंगल में घूमने वाले लोगों के लिए इसे देख पाना बेहद मुश्किल होता है। रात में जब जंगल का बड़ा हिस्सा शांत दिखाई देता है, तब इसकी गतिविधियां शुरू होती हैं। यही कारण है कि कैमरे में इसका रिकॉर्ड होना वन्यजीव निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कैमरा सिर्फ जानवर की तस्वीर नहीं पकड़ता, बल्कि वह जंगल के उस हिस्से की गतिविधियों को सामने लाता है जो सामान्य सर्वेक्षण में आसानी से दिखाई नहीं देता।
पेड़ों की सेहत से जुड़ा संकेत
उड़न गिलहरी जैसी प्रजातियों का अस्तित्व सीधे तौर पर जंगल के पेड़-पौधों और ऊपरी वन आवास से जुड़ा होता है। उसे पेड़ों के बीच आवाजाही, भोजन और आश्रय के लिए पर्याप्त वनस्पति की जरूरत होती है। इसलिए किसी ऐसे वन क्षेत्र में इसकी मौजूदगी जहां घना और निरंतर वृक्ष आवरण मौजूद है, वहां के आवास की गुणवत्ता को समझने में उपयोगी संकेत दे सकती है। हालांकि केवल एक कैमरा रिकॉर्ड के आधार पर पूरे जंगल की सेहत या प्रजाति की आबादी पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए लंबे समय तक निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी होगा।
असली कहानी अब शुरू होती है
उड़न गिलहरी का वीडियो सामने आना निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ाने वाली खबर है, लेकिन संरक्षण की दृष्टि से इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आगे की निगरानी है।
क्या यह रिजर्व में नियमित रूप से मौजूद है?
क्या इसकी संख्या बढ़ रही है?
कौन से वन क्षेत्र इसके लिए ज्यादा अनुकूल हैं?
क्या इसके आवास में कोई बदलाव हो रहा है?
इन सवालों के जवाब आगे की कैमरा ट्रैपिंग और वैज्ञानिक निगरानी से मिल सकते हैं। उदंती-सीतानदी का जंगल सिर्फ बाघों या बड़े वन्यजीवों का घर नहीं है। उसकी असली जैव विविधता उन छोटी और दुर्लभ प्रजातियों में भी छिपी है, जो जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में अपनी भूमिका निभाती हैं। कैमरे में कैद उड़न गिलहरी इसलिए सिर्फ एक दुर्लभ तस्वीर नहीं… यह जंगल की ऊंची शाखाओं में अब भी जिंदा उस प्राकृतिक दुनिया की झलक है, जिसे बचाए रखना पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जरूरी है।