दीपावली की रोशनी के बाद अक्सर घरों में पुराने मिट्टी के दीये बेकार समझकर रख दिए जाते हैं या फेंक दिए जाते हैं। लेकिन थोड़ी सी रचनात्मकता इन्हीं दीयों को घर की सबसे आकर्षक सजावटी वस्तु में बदल सकती है। इस बार सजावट के लिए बाजार से महंगी चीजें खरीदने के बजाय पुराने दीयों से तैयार करें खूबसूरत वॉल हैंगिंग। यह केवल घर की सुंदरता बढ़ाने का तरीका नहीं, बल्कि पुनः उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय हस्तकला को बढ़ावा देने का भी एक दिलचस्प उदाहरण है।
पुराने दीये, सजावट का नया अंदाज
दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई और सजावट की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दौरान पुराने दीये, सजावटी सामान और अनुपयोगी वस्तुएं सामने आती हैं। आमतौर पर लोग इन्हें बेकार समझकर अलग कर देते हैं, लेकिन अब इन्हीं पुराने दीयों को नया रूप देने का चलन आकर्षित कर रहा है।
खास बात यह है कि मिट्टी के दीयों को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए बहुत ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है। थोड़े रंग, कुछ मोती, सजावटी पत्थर, मजबूत धागा और अपनी कल्पनाशक्ति से इन्हें खूबसूरत वॉल हैंगिंग में बदला जा सकता है।
मिट्टी के दीयों से तैयार होगी आकर्षक वॉल हैंगिंग
इस सजावटी प्रयोग की शुरुआत छोटे और बड़े मिट्टी के दीये चुनने से होती है। इनके बीच में सावधानी से छेद तैयार किया जाता है, ताकि इन्हें धागों में पिरोया जा सके। इसके बाद दीयों पर सफेद रंग की आधार परत लगाकर लाल, पीले, नीले और हरे रंगों से आकर्षक डिजाइन बनाए जा सकते हैं।
दीयों को और खूबसूरत बनाने के लिए मोती, शीशे, चमकीले पत्थर, झालर और कृत्रिम फूलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जब रंग और सजावट पूरी तरह सूख जाए तो अलग-अलग लंबाई के धागों में दीयों को पिरोकर एक सुंदर लटकन तैयार की जाती है। अंत में बड़े दीये या मजबूत आधार के साथ सभी धागों को जोड़कर वॉल हैंगिंग का आकार दिया जा सकता है।
कम खर्च में घर को मिलेगा पारंपरिक लुक
इस प्रयोग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पुराने सामान का इस्तेमाल करके नई सजावटी वस्तु तैयार होती है। बाजार से महंगी वॉल हैंगिंग खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार, बैठक, बालकनी या पूजा स्थल को पारंपरिक और आकर्षक रूप दिया जा सकता है।
रंगों और डिजाइन के साथ प्रयोग करके हर परिवार अपनी पसंद के मुताबिक अलग-अलग कलाकृति बना सकता है। बच्चों को भी इस तरह की रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उनकी कलात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
कचरे से कला तक, बदलती सोच का संदेश
दरअसल, पुराने दीयों से सजावट तैयार करना केवल एक घरेलू उपाय नहीं है। यह उस सोच को भी आगे बढ़ाता है, जिसमें किसी वस्तु की उपयोगिता खत्म होने के बाद भी उसे नया जीवन दिया जा सकता है। इससे अनावश्यक कचरा कम करने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और पारंपरिक मिट्टी के दीयों के प्रति आकर्षण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इस दीपावली सजावट का मतलब सिर्फ नई चीजें खरीदना नहीं, बल्कि पुरानी चीजों में नई खूबसूरती तलाशना भी है। जो दीये कल तक घर के कोने में पड़े थे, वही अब दीवार की शोभा बन सकते हैं। जरूरत सिर्फ उन्हें देखने का नजरिया बदलने की है। सावधानी: मिट्टी के दीयों में छेद करते समय ड्रिल या अन्य औजार का इस्तेमाल बेहद संभलकर करें। दीये टूटने से बचाने के लिए कम दबाव रखें और बच्चों को यह काम बड़ों की निगरानी में ही करने दें।