पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, राज्यपाल आरएन रवि का बड़ा फैसला

West Bengal Assembly dissolved

पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, राज्यपाल आरएन रवि का बड़ा फैसला

चुनाव परिणाम के बाद बढ़े सियासी तनाव के बीच कार्रवाई, नई सरकार गठन का रास्ता साफ

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम सामने आया, जब राज्यपाल आरएन रवि ने राज्य विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया। यह फैसला 2026 विधानसभा चुनावों के बाद बने राजनीतिक गतिरोध और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया के बीच लिया गया है।

राजभवन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत राज्यपाल को प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए 17वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है। यह आदेश 7 मई 2026 से लागू माना जाएगा। इसके साथ ही अब 18वीं विधानसभा के गठन का संवैधानिक रास्ता साफ हो गया है।

चुनाव परिणाम के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद राज्य की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई थी। चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कथित “वोट चोरी” का आरोप लगाया था।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से भी इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्य में संवैधानिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी बीच राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा भंग करने का निर्णय लिया।

अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत कार्रवाई

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 174 राज्यपाल को विधानसभा बुलाने, स्थगित करने और भंग करने का अधिकार देता है। इसके क्लॉज 2(b) के तहत राज्यपाल विधानसभा को भंग कर सकते हैं, जिससे नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और नई सरकार के गठन के लिए विधानसभा भंग करना एक औपचारिक लेकिन अहम कदम माना जाता है। राज्यपाल के इस फैसले के बाद अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

बीजेपी ने फैसले का किया स्वागत

भारतीय जनता पार्टी ने राज्यपाल के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में जनादेश दिया है और अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नई सरकार का गठन होना चाहिए।

बीजेपी का दावा है कि बंगाल की जनता ने लंबे समय बाद राज्य में नई राजनीतिक दिशा के लिए मतदान किया है और अब विकास तथा कानून व्यवस्था को प्राथमिकता देने वाली सरकार बनेगी।

टीएमसी ने जताई नाराजगी

वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया है। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव में कई स्तरों पर अनियमितताएं हुईं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

हालांकि राज्यपाल के आदेश के बाद संवैधानिक रूप से 17वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त माना जाएगा और अब नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नई सरकार गठन की तैयारियां तेज

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार बीजेपी विधायक दल की बैठक जल्द आयोजित हो सकती है, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा। इसके बाद राज्यपाल नई सरकार गठन के लिए औपचारिक निमंत्रण दे सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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