उत्तरप्रदेश विधान परिषद चुनाव: वाराणसी MLC चुनाव का बिगुल….2027 से पहले सियासी टेस्ट

Uttar Pradesh Legislative Council Elections

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले वाराणसी खंड के स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो गया है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक दोनों सीटों पर मतदान 23 अक्टूबर 2026 को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। चुनाव कार्यक्रम के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।

1. 29 सितंबर से शुरू होगा चुनावी मैदान

चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर तय की गई है। 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा, जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

2. दो सीटें, दो अलग वोटर वर्ग

यह चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है। यहां स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। वाराणसी जिला प्रशासन की वेबसाइट पर दोनों निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों और चुनाव संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं। मौजूदा कार्यक्रम दिसंबर में कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली होने वाली सीटों के लिए है। स्नातक सीट से आशुतोष सिंह और शिक्षक सीट से लाल बिहारी यादव का कार्यकाल समाप्त होना है।

3. बीजेपी ने पहले ही शुरू कर दिया मंथन

दिलचस्प बात यह है कि चुनाव कार्यक्रम आने से पहले ही बीजेपी के काशी क्षेत्र ने तैयारी शुरू कर दी थी। सितंबर के मध्य में हुई बैठक में 8 जिलों के प्रशासनिक संगठन से जुड़े पदाधिकारी और 10 जिलों के संगठनात्मक प्रतिनिधि शामिल हुए थे। पार्टी नेताओं ने पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने और सूची को अपडेट करने पर जोर दिया। बीजेपी के क्षेत्रीय नेतृत्व ने इन चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण संगठनात्मक परीक्षा के तौर पर देखा है। हालांकि यह पार्टी का आकलन है, इसे चुनाव परिणाम का पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता।

4. शिक्षक और स्नातक वोटर क्यों अहम?

एमएलसी चुनाव का यह वर्ग सीधे तौर पर शिक्षकों और स्नातकों से जुड़ा है। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए यहां मुद्दे भी सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग हो सकते हैं। शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, नियुक्तियां, वित्तविहीन विद्यालयों की स्थिति और उच्च शिक्षा से जुड़े सवाल चुनावी बहस में प्रमुख हो सकते हैं। समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता और मौजूदा शिक्षक एमएलसी लाल बिहारी यादव पहले ही शिक्षक समुदाय के बीच संपर्क और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की कवायद को लेकर बैठकें कर चुके हैं।

5. 2027 से पहले वाराणसी का सियासी संदेश

सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यही है कि 23 अक्टूबर का एमएलसी चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हो रहा है। लिहाजा राजनीतिक दल इसे अपने संगठन, मतदाता संपर्क और स्थानीय मुद्दों की पकड़ को परखने के अवसर के रूप में देख सकते हैं। खासकर वाराणसी क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। बीजेपी के काशी क्षेत्र ने अपनी बैठक में इसी संदर्भ में संगठन की जिम्मेदारी बढ़ने की बात कही थी।

वाराणसी खंड का शिक्षक-स्नातक एमएलसी चुनाव संख्या में भले सीमित हो, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व व्यापक है। 29 सितंबर से नामांकन, 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को नतीजे—इन तीन तारीखों के बीच उम्मीदवार चयन, मतदाता सूची, शिक्षक-स्नातक संपर्क और संगठन की सक्रियता पर पूरा फोकस रहेगा। और क्योंकि इसके तुरंत बाद 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी और तेज होगी, वाराणसी का यह चुनाव प्रदेश की बड़ी राजनीतिक तस्वीर में एक महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जाएगा।

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