मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संधि के पक्षकारों का 17वां
सम्मेलन (COP17) 17 अगस्त को मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में
उद्घाटित हुआ।
दो सप्ताह तक चलने वाले इस सम्मेलन का विषय है "भूमि का पुनर्स्थापन,
आशा की नई किरण"। इसमें भूमि क्षरण के पुनर्स्थापन, सतत् भूमि प्रबंधन,
सूखा प्रतिरोधक क्षमता निर्माण और घास के मैदानों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन
जैसे विषयों पर परामर्श और विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
इस संधि के सचिवालय की कार्यकारी सचिव यास्मीन फौद ने कहा कि
भूमि क्षरण और सूखा अब दूर की पर्यावरणीय समस्याएं नहीं रह गई हैं। स्वस्थ
भूमि एक स्वस्थ खाद्य प्रणाली, एक लचीली अर्थव्यवस्था और एक स्थिर समाज
की नींव है; इसलिए, COP17 को इसके कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना
चाहिए। ऐसे समय में जब बहुपक्षवाद चुनौतियों का सामना कर रहा है, COP17
दुनिया को यह प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करता है कि लोगों के जीवन को
बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक समाधान प्रदान करने के लिए मिलकर काम
कर सकते हैं।
चीन सरकार का प्रतिनिधिमंडल वित्तपोषण, सूखा राहत और घास के मैदानों
पर उच्च स्तरीय संवाद में भाग लेगा। चीन ने अंतर्राष्ट्रीय घास के मैदान दिवस
की स्थापना का प्रस्ताव रखा है, जो अंतर्राष्ट्रीय घास के मैदान और चरवाहा वर्ष के
परिणामों के दीर्घकालिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण घटक होगा। इससे घास के
मैदानों के संरक्षण और पुनर्स्थापन में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा
और संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत् विकास एजेंडा के कार्यान्वयन में सकारात्मक
योगदान मिलेगा।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)





