पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेज़ी से उभरा नाम सायोनी घोष एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनके भाषण नहीं बल्कि बदला हुआ राजनीतिक रुख है। कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सबसे मुखर युवा सांसदों में गिनी जाने वाली सायोनी घोष अब नई राजनीतिक पारी में मोदी सरकार के समर्थन में खुलकर खड़ी दिखाई दे रही हैं। संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सरकार ने उन्हें अपने प्रमुख वक्ताओं में शामिल किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर चार महीनों में सायोनी घोष की राजनीति में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया?
टीएमसी की आक्रामक सांसद से एनसीपीआई का नया चेहरा
जाधवपुर लोकसभा सीट से 2024 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनीं सायोनी घोष को पार्टी का तेज़तर्रार चेहरा माना जाता था। संसद हो या सड़क, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों पर लगातार हमलावर रहती थीं।
हालांकि पश्चिम बंगाल की बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने टीएमसी का साथ छोड़ दिया और काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एनसीपीआई का दामन थाम लिया। पार्टी बदलने के साथ ही उनकी राजनीतिक रणनीति और बयानबाज़ी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। अब वही सायोनी घोष केंद्र सरकार के विधेयकों का समर्थन करती और विपक्ष पर सवाल उठाती नजर आ रही हैं।
पेपर लीक बिल पर सरकार के पक्ष में उतरने की तैयारी
लोकसभा में पेश किए गए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के लिए सरकार ने जिन सांसदों को चुना है, उनमें सायोनी घोष का नाम भी शामिल है।
सायोनी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बच रहा है। उनका कहना है कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषय पर रचनात्मक बहस होनी चाहिए और यदि विपक्ष के पास बेहतर सुझाव हैं तो उन्हें सदन में रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसद का हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और देश के युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि नए कानून में कौन-कौन से सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। उनके इस बयान को उनकी नई राजनीतिक भूमिका का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
कभी शायरी से घेरती थीं सरकार, अब विपक्ष पर साध रहीं निशाना
सायोनी घोष की पहचान केवल एक सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में भी रही है। उनके भाषणों में हिंदी, बांग्ला और अंग्रेज़ी के साथ गीत, कविता और शायरी का प्रयोग अक्सर चर्चा का विषय बनता रहा है।
बजट सत्र के दौरान उन्होंने संविधान को अपनी “भगवद्गीता” बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए थे। विदेश नीति से लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं तक, उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। उनके भाषण सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से वायरल हुए।
लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। सरकार पर निशाना साधने वाली सायोनी घोष अब विपक्ष से सवाल पूछ रही हैं और संसद में सरकार के पक्ष को मजबूती से रखने की तैयारी कर रही हैं।
संसद में आज होगी नई राजनीतिक पहचान की परीक्षा
राजनीतिक दल बदलने के बाद यह पहला बड़ा अवसर होगा जब सायोनी घोष लोकसभा में मोदी सरकार के समर्थन में विस्तृत पक्ष रखेंगी। सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर होने वाली चर्चा में उनकी भूमिका पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की निगाहें रहेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सायोनी घोष का यह बदलाव केवल पार्टी परिवर्तन नहीं, बल्कि उनकी नई राजनीतिक दिशा का संकेत है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जो सांसद कभी शायरी के जरिए सरकार पर तीखे प्रहार करती थीं, वही आज उसी सरकार की नीतियों का बचाव किस अंदाज में करती हैं। संसद में उनका भाषण न केवल इस विधेयक की बहस का केंद्र होगा, बल्कि उनके नए राजनीतिक सफर की दिशा भी तय कर सकता है।





