Tamil Nadu की राजनीति में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मुख्यमंत्री Vijay की नई सरकार के मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत को फिर सबसे आखिर में बजाया गया, जिसके बाद विपक्ष और सहयोगी दलों ने नाराजगी जताई है। इससे पहले भी विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ के दौरान यही विवाद खड़ा हुआ था और तब सरकार ने भविष्य में ऐसा नहीं होने का भरोसा दिया था। लेकिन महज एक हफ्ते बाद दोबारा वही स्थिति बनने से राजनीतिक माहौल गर्मा गया है।
शपथ समारोह में पहले ‘वंदे मातरम’, फिर राष्ट्रगान और आखिर में बजा तमिल राज्य गीत
गुरुवार को आयोजित मंत्री शपथ समारोह में सबसे पहले ‘वंदे मातरम’ बजाया गया। इसके बाद राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ हुआ और अंत में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ प्रस्तुत किया गया। तमिलनाडु में लंबे समय से चली आ रही परंपरा के मुताबिक सरकारी कार्यक्रमों में राज्य गीत सबसे पहले गाया जाता रहा है। इसी वजह से इस क्रम को बदलने पर फिर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों और सहयोगी पार्टियों ने इसे तमिल अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सवाल उठाए हैं।
TVK ने फिर राज्यपाल कार्यालय पर डाली जिम्मेदारी, कहा- सरकार की भूमिका नहीं
विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि समारोह का आयोजन राज्यपाल भवन की ओर से किया गया था और गीतों का क्रम वहीं तय किया गया। पार्टी नेता नांजिल संपत ने कहा कि तमिलनाडु सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं थी और विधानसभा या राज्य सरकार के कार्यक्रमों में तमिल गीत पहले ही गाया जाएगा। इससे पहले भी मंत्री आदव अर्जुना ने कहा था कि केंद्र सरकार के नए निर्देशों के कारण ऐसा हुआ।
DMK और सहयोगी दलों ने विजय सरकार को घेरा, पूछा- वादा कहां गया?
मुख्य विपक्षी दल Dravida Munnetra Kazhagam यानी DMK ने इस मुद्दे पर विजय सरकार को घेर लिया है। पार्टी प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछली बार दिए गए आश्वासन का क्या हुआ। वाम दलों और कांग्रेस नेताओं ने भी इसे परंपरा के खिलाफ बताया। CPI नेता एम वीरपांडियन ने कहा कि सरकार को जनता को बताना चाहिए कि आखिर यह गलती किसकी वजह से हुई।
कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी पर लगाया राजनीति करने का आरोप
कांग्रेस सांसद S. Jothimani ने इस विवाद के लिए बीजेपी और राज्यपाल कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हमेशा सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत से होती रही है और आखिर में राष्ट्रगान गाया जाता है। वहीं Vaiko ने भी ‘वंदे मातरम’ को सरकारी कार्यक्रमों में शामिल करने का विरोध किया और कहा कि तमिलनाडु सरकार को इसे किसी भी हालत में लागू नहीं करना चाहिए।
केंद्र सरकार के नए निर्देश के बाद बढ़ा विवाद, 150वीं वर्षगांठ से जुड़ा मामला
केंद्र सरकार ने हाल ही में एक निर्देश जारी किया है जिसमें औपचारिक और सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण बजाना अनिवार्य बताया गया है। यह फैसला राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर लिया गया है। लेकिन तमिलनाडु में इसे सांस्कृतिक पहचान और राज्य अधिकारों से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा अब केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रह गया बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है।