दस दिन में तीसरी बार झटका: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, बढ़ा महंगाई का दबाव..जानें आपके शहर में पेट्रोल डीजल के दाम

Petrol and diesel prices

देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 10 दिनों में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे परिवहन से लेकर घरेलू बजट तक पर असर साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही CNG उपभोक्ताओं को भी झटका लगा है, क्योंकि CNG के दाम में 1 रुपये प्रति किलो की वृद्धि कर दी गई है।

  1. पेट्रोल-डीजल ने फिर बढ़ाई चिंता
  2. दस दिन में तीसरी बार झटका
  3. CNG महंगी, यात्रियों पर असर
  4. महानगरों में ईंधन के नए रेट
  5. बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव

नई कीमतों के लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण लोगों के सामने यात्रा और रोजमर्रा के खर्चों का बोझ बढ़ता जा रहा है।

देश के चारों महानगरों में ईंधन की नई कीमतों ने वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। मुंबई में पेट्रोल 108.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 110.64 रुपये और डीजल 97.02 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 105.31 रुपये और डीजल 96.98 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू टैक्स संरचना की वजह से लगातार कीमतों में वृद्धि हो रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों में वैट और स्थानीय कर अलग-अलग होने के कारण कीमतों में अंतर दिखाई देता है।

इस बार की बढ़ोतरी के बाद पिछले आठ दिनों में दिल्ली में पेट्रोल करीब 4.74 रुपये और डीजल लगभग 4.82 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। मई महीने में लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों के बजट को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों पर इसका सबसे अधिक असर देखा जा रहा है। 15 मई को तेल कंपनियों ने पहली बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस दिन पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में एक साथ 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। दिल्ली में पेट्रोल का दाम 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गया था, जबकि डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। उस समय भी लोगों ने इसे महंगाई का बड़ा झटका बताया था।

इसके बाद 19 मई को दूसरी बार कीमतों में इजाफा हुआ। उस दिन दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया। अब ताजा बढ़ोतरी के बाद राजधानी में पेट्रोल लगभग 100 रुपये प्रति लीटर के बेहद करीब पहुंच गया है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थिति और अधिक महंगी हो गई है। यहां पेट्रोल 109.77 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमत 95.83 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। राजस्थान उन राज्यों में शामिल है जहां ईंधन पर लगने वाला वैट अपेक्षाकृत अधिक है, जिसकी वजह से यहां कीमतें अन्य शहरों की तुलना में ज्यादा रहती हैं। CNG उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिली है। दिल्ली में CNG की कीमत 80.09 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसका असर ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में किराए बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

बढ़ती ईंधन कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिससे सब्जियों, खाद्यान्न, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने लगती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में खुदरा महंगाई दर पर भी असर दिखाई दे सकता है। विपक्षी दलों ने बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि लगातार बढ़ते टैक्स और तेल कंपनियों की मूल्य नीति के कारण जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। वहीं सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और आयात लागत का असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। फिलहाल आम लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में कीमतों में राहत मिलेगी या नहीं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ईंधन की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई की बड़ी वजह बन सकती हैं।

कच्चे तेल की महंगाई से बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी अनिश्चितता ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को प्रभावित किया है। इसके चलते दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है। यही कारण है कि निवेशक और तेल कंपनियां भविष्य की संभावित कमी को देखते हुए कीमतें बढ़ाने लगती हैं। वर्तमान समय में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी इसी चिंता की बड़ी वजह बना हुआ है।

85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात

भारत पर इसका असर इसलिए ज्यादा पड़ता है क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही भारतीय तेल कंपनियों की लागत बढ़ जाती है और उसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। यह स्तर पिछले कई महीनों की तुलना में काफी ऊंचा माना जा रहा है। कच्चे तेल की इस तेजी ने दुनिया के कई देशों में ईंधन कीमतों को प्रभावित किया है।

आने वाले दिनों में और हो सकती है बढ़ोतरी

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य करों की दरें अलग होने के कारण ईंधन कीमतों में अंतर दिखाई देता है। यही वजह है कि कुछ राज्यों में पेट्रोल 100 रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर परिवहन लागत, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।

वहीं सरकार और तेल कंपनियां लगातार वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। आम जनता को अब उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद ईंधन दरों में कुछ राहत मिल सकेगी।

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