घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कमजोर वैश्विक संकेतों, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। रियल्टी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है और आने वाले सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
सेंसेक्स 715 अंक लुढ़का और निफ्टी 24 हजार के अहम स्तर से नीचे बंद हुआ
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,755.05 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79 प्रतिशत टूटकर 23,996.25 पर आ गया। निफ्टी का 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद होना बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस स्तर के नीचे कमजोरी बनी रहने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।
तकनीकी संकेतों के अनुसार 24,200 का स्तर बना सबसे बड़ी चुनौती, नीचे जाने पर बढ़ सकता है दबाव
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर फिलहाल सबसे मजबूत रेजिस्टेंस बनकर उभरा है। उनका कहना है कि यदि सूचकांक इस स्तर को मजबूती से पार करता है, तभी बाजार में फिर से तेजी का माहौल बन सकता है। दूसरी ओर यदि निफ्टी लगातार 24,000 से नीचे बना रहता है तो यह कमजोरी को और बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में सूचकांक 23,900 से 23,800 के सपोर्ट ज़ोन तक फिसल सकता है, जिससे अल्पकालिक निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।
रियल्टी, पीएसयू बैंक और आईटी शेयरों में बिकवाली से बाजार पर बढ़ा दबाव
मंगलवार के कारोबार में सबसे अधिक कमजोरी रियल्टी सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.6 प्रतिशत टूट गया। इसके अलावा मीडिया इंडेक्स में भी 2.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), फार्मा और निजी बैंकिंग शेयरों में भी करीब 1 प्रतिशत तक की कमजोरी रही। निफ्टी की प्रमुख कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज़ और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे अधिक गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी रही बड़ी गिरावट, निवेशकों ने अपनाई सतर्क रणनीति
केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी बिकवाली का असर साफ दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.09 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की अगली चाल तय करेंगी।