Spotrs News Update: टीम इंडिया की लगातार हार पर उठे सवाल: पूर्व कप्तान श्रीकांत ने गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर जताई गंभीर चिंता

भारतीय क्रिकेट टीम के हालिया विदेशी दौरे के प्रदर्शन ने एक बार फिर टीम की रणनीति और चयन प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे में उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिलने के बाद अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर कृष्णमाचारी श्रीकांत ने हेड कोच गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट से जवाबदेही की मांग की है। उनका कहना है कि केवल कमजोर टीमों के खिलाफ जीत दर्ज करने से भारतीय टीम की वास्तविक तैयारी का आकलन नहीं किया जा सकता। उन्होंने खिलाड़ियों की लगातार बदलती भूमिका और प्लेइंग इलेवन में हो रहे प्रयोगों को भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए चिंता का विषय बताया।

कमजोर टीमों पर जीत को सफलता मानना भारतीय क्रिकेट के लिए सही संकेत नहीं माना जा सकता

अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने कहा कि भारतीय टीम जब भी छोटे देशों के खिलाफ सीरीज जीतती है तो उसकी जमकर तारीफ होने लगती है, लेकिन मजबूत विपक्ष के सामने टीम की कमियां उजागर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जिम्बाब्वे, श्रीलंका और वेस्टइंडीज जैसी टीमों के खिलाफ जीत को यदि बड़ी उपलब्धि माना जाएगा तो टीम के प्रदर्शन का सही मूल्यांकन कभी नहीं हो पाएगा। उनके अनुसार टीम प्रबंधन को कठिन मुकाबलों में मिली हार का भी ईमानदारी से विश्लेषण करना चाहिए।

विश्व कप से पहले लगातार प्रयोग करने की रणनीति पर श्रीकांत ने उठाए बड़े सवाल

पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम को एक स्थिर संयोजन के साथ खेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार बल्लेबाजी क्रम और प्लेइंग इलेवन में बदलाव करने से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास प्रभावित होता है। टीम को यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस खिलाड़ी की भूमिका क्या होगी, ताकि बड़े मुकाबलों में किसी तरह की असमंजस की स्थिति पैदा न हो। उनके अनुसार बार-बार किए जा रहे बदलाव भविष्य की तैयारी को कमजोर कर सकते हैं।

केएल राहुल की बल्लेबाजी क्रम को लेकर जताई नाराजगी, विराट कोहली के साथ भेजने की दी सलाह

श्रीकांत ने विशेष रूप से केएल राहुल के बल्लेबाजी क्रम पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब टीम बड़े लक्ष्य का पीछा कर रही हो और शुरुआती विकेट गिर जाएं, तब राहुल जैसे अनुभवी बल्लेबाज को ऊपर भेजना ज्यादा उपयोगी होता। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 विश्व कप के दौरान राहुल और विराट कोहली ने कई महत्वपूर्ण साझेदारियां निभाई थीं। ऐसे खिलाड़ी को निचले क्रम में भेजना टीम के हित में नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक जब रन रेट बहुत अधिक हो जाए, तब किसी भी बल्लेबाज के लिए मैच निकालना आसान नहीं होता।

संजू सैमसन और युवा खिलाड़ियों के उदाहरण देकर टीम चयन पर भी साधा निशाना

पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि लगातार प्रयोगों का असर केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने दावा किया कि पहले भी कुछ खिलाड़ियों को स्थिर अवसर नहीं मिले और अब उसी तरह की स्थिति दोबारा दिखाई दे रही है। उनका मानना है कि यदि किसी खिलाड़ी पर भरोसा किया जाता है तो उसे लगातार मौके भी मिलने चाहिए, ताकि वह अपनी भूमिका में बेहतर प्रदर्शन कर सके। बार-बार बदलाव करने से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास प्रभावित होता है और टीम का संतुलन भी बिगड़ता है।

बड़े टूर्नामेंट से पहले जवाबदेही और स्पष्ट रणनीति की जरूरत सबसे ज्यादा

श्रीकांत का मानना है कि विश्व कप की तैयारी केवल सीरीज जीतने से पूरी नहीं होती, बल्कि मजबूत विरोधियों के खिलाफ सही संयोजन, स्पष्ट रणनीति और खिलाड़ियों की निश्चित भूमिका तय करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ को अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेनी होगी, क्योंकि आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं। उनके अनुसार भारतीय टीम के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत केवल सही योजना और स्थिर नेतृत्व की है।

 

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