कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत के साथ भारतीय दल एक बार फिर दमदार प्रदर्शन की उम्मीद लेकर मैदान में उतरेगा। हालांकि इस बार का टूर्नामेंट पिछले संस्करणों से बिल्कुल अलग होगा। आयोजकों ने प्रतियोगिता में शामिल खेलों की संख्या 19 से घटाकर केवल 10 कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ने वाला है, क्योंकि जिन खेलों में भारत ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा पदक जीते थे, उनमें से कई इस बार कार्यक्रम का हिस्सा ही नहीं हैं। ऐसे में भारत के लिए पिछली बार के 61 पदकों के आंकड़े को दोहराना बेहद कठिन माना जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया के हटने के बाद ग्लासगो ने संभाली मेजबानी, कम बजट के कारण बदल गया पूरा प्रारूप
दरअसल, 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया शहर को मिली थी, लेकिन बढ़ती लागत के कारण उसने आयोजन से अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद स्कॉटलैंड के ग्लासगो ने सीमित बजट में खेलों की मेजबानी स्वीकार की। इसी वजह से आयोजकों ने खेलों की संख्या में बड़ी कटौती करते हुए 19 की जगह केवल 10 खेलों को शामिल किया। इस फैसले का सीधा असर उन देशों पर पड़ा है, जो पारंपरिक रूप से कई अलग-अलग खेलों में मजबूत प्रदर्शन करते रहे हैं।
भारत के सबसे सफल खेल ही हुए बाहर, 61 में से 28 पदक दिलाने वाले इवेंट नहीं होंगे शामिल
ग्लासगो संस्करण से कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और महिला क्रिकेट जैसे खेलों को बाहर कर दिया गया है। यही वे खेल थे, जिनमें भारत ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 61 में से 28 पदक अपने नाम किए थे। इनमें कुश्ती ने 12 पदक (6 स्वर्ण), बैडमिंटन ने 6 पदक (3 स्वर्ण), टेबल टेनिस ने 7 पदक, हॉकी ने 2 पदक और महिला क्रिकेट ने 1 रजत पदक दिलाया था। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस बार भारत के लिए 30 पदकों का आंकड़ा पार करना भी आसान नहीं होगा।
एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग पर टिकी सबसे बड़ी उम्मीद, नीरज चोपड़ा और मीराबाई चानू पर रहेंगी निगाहें
खेलों की संख्या कम होने के बावजूद भारत के पास कई मजबूत दावेदार मौजूद हैं। एथलेटिक्स में ओलंपिक और विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुके नीरज चोपड़ा भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर, लंबी दूरी की दौड़ में पारुल चौधरी और गुलवीर सिंह से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक रजत पदक विजेता और कॉमनवेल्थ चैंपियन मीराबाई चानू भारत की सबसे बड़ी उम्मीद होंगी। उनके अलावा बिंदियारानी देवी, अजया बाबू और ज्ञानेश्वरी यादव जैसे खिलाड़ी भी पदक की दौड़ में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
बॉक्सिंग में भी भारत की नजर कई पदकों पर, महिला मुक्केबाजों से सबसे ज्यादा उम्मीद
बॉक्सिंग भारत के लिए इस बार भी अहम खेल साबित हो सकता है। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन और मौजूदा विश्व चैंपियन जैसमीन लांबोरिया महिला वर्ग में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद होंगी। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में भारतीय मुक्केबाज कई भार वर्गों में मजबूत दावेदारी पेश करेंगे। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित खेलों के बावजूद यदि भारत एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग में अपेक्षित प्रदर्शन करता है तो वह सम्मानजनक पदक तालिका हासिल कर सकता है।