चीन का महानगर शांगहाई इन दिनों सिर्फ चीन के आर्थिक और कारोबारी केंद्र के रूप में नहीं,
बल्कि दुनिया भर के सीफूड कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में भी नजर आ रहा है। 26 से 28 अगस्त
तक शांगहाई न्यू इंटरनेशनल एक्सपो सेंटर में वर्ल्ड सीफूड शांगहाई 2026 का आयोजन हो रहा है।
इसमें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से सीफूड उत्पादक, निर्यातक, आयातक, खरीदार, वितरक,
प्रसंस्करण कंपनियां और खाद्य सेवा से जुड़ी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इस प्रदर्शनी में सीफूड
कारोबार की बदलती तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।
इस बार का आयोजन इसलिए भी खास है, क्योंकि वर्ल्ड सीफूड शांगहाई अपने 20वें संस्करण में
पहुंच गया है। दो दशक पहले शुरू हुआ यह आयोजन अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच के रूप
में अपनी पहचान बना चुका है। इसका मकसद अलग-अलग देशों के सीफूड उत्पादों को प्रदर्शित
करने के साथ आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों को सीधे जोड़ना, नए कारोबारी अवसर पैदा करना और
पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
इस साल प्रदर्शनी करीब 60 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में लगाई गई है। यहां 1,000 से ज्यादा सीफूड
प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं और करीब 1 लाख पेशेवर आगंतुकों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन में
68 देशों की भागीदारी दर्ज की गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि सीफूड कारोबार अब किसी एक देश या
क्षेत्र तक सीमित नहीं है। समुद्र से निकलने वाला एक झींगा या मछली कई देशों की सप्लाई चेन से
गुजरते हुए दुनिया के दूसरे छोर पर किसी उपभोक्ता की खाने की मेज तक पहुंच सकती है।
प्रदर्शनी में ताजी और जमी हुई मछलियों से लेकर झींगा, केकड़ा, सीप और दूसरे जलीय उत्पाद पेश
किए जा रहे हैं। इसके साथ प्रसंस्कृत सीफूड, पहले से तैयार भोजन, प्रीमियम सामग्री, ऑनलाइन
बिक्री से जुड़े उत्पाद, जलीय कृषि तकनीक, प्रसंस्करण उपकरण और उद्योग से जुड़ी सेवाएं भी
शामिल हैं। यानी यह सिर्फ खाने की चीजों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण,
पैकेजिंग और बाजार तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को समझने का मौका है।
इसी वैश्विक बाजार में भारत भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। भारत की ओर से समुद्री
उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के पैवेलियन में 16 प्रमुख भारतीय सीफूड निर्यातक
अपने उत्पाद पेश कर रहे हैं। भारतीय कंपनियां दुनिया के खरीदारों को यह बताने की कोशिश कर
रही हैं कि भारत केवल बड़े पैमाने पर सीफूड का उत्पादन करने वाला देश नहीं है, बल्कि गुणवत्ता,
विविधता और मूल्यवर्धित उत्पादों के मामले में भी उसकी मजबूत पहचान है।
भारत की भागीदारी का एक खास आकर्षण सीफूड चखने के कार्यक्रम रहे। पहले दिन MPEDA
पैवेलियन में बड़ी संख्या में आगंतुक पहुंचे। खास बात यह रही कि भारतीय सीफूड को केवल
पारंपरिक भारतीय स्वाद में पेश नहीं किया गया। भारतीय स्वाद को चीनी खानपान की परंपरा के
साथ जोड़कर एक नया प्रयोग किया गया।
इस सीफूड एक्सपो में हिस्सा ले रहे पेइचिंग के “दास्तान इंडियन रेस्तरां” के संस्थापक और मास्टर
शेफ रबियुल बक्श ने CGTN हिन्दी से बातचीत में बताया कि शांगहाई में चीनी लोगों के बीच
भारतीय सीफूड को लेकर काफी उत्सुकता दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, चखने के कार्यक्रम में
लोगों की दिलचस्पी खास तौर पर देखने लायक रही। ब्लैक पेपर श्रिम्प को चीनी शैली की सोया
सॉस के साथ परोसे जाने के बाद आगंतुकों ने इसे पसंद किया और भारतीय सीफूड को करीब से
जानने में रुचि दिखाई।
मास्टर शेफ रबियुल बक्श का यह भी कहना है कि किसी भी फूड एक्सपो में स्वाद चखने का महत्व
काफी ज्यादा होता है। तस्वीर देखकर किसी उत्पाद को लेकर उत्सुकता पैदा हो सकती है, लेकिन
स्वाद चखने के बाद उपभोक्ता उससे सीधे जुड़ता है। यह भारतीय सीफूड को संभावित खरीदारों और
उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रभावी तरीका भी है।
इसके साथ एक और बात सामने आती है। आज दुनिया के खाद्य बाजारों में उपभोक्ता केवल यह
नहीं देखता कि खाना कहां से आया है। वह यह भी देखता है कि उसका स्वाद और उसे तैयार करने
का तरीका उसकी पसंद के कितना करीब है। इसलिए स्थानीय स्वाद के अनुसार अंतरराष्ट्रीय
उत्पाद पेश करना कारोबार की अहम रणनीति बन गया है।
ब्लैक पेपर श्रिम्प का चीनी शैली की सोया सॉस के साथ पेश किया जाना इसी सोच का उदाहरण है।
यह डिश सिर्फ एक नया स्वाद नहीं रही, बल्कि भारत और चीन की खानपान परंपराओं के बीच एक
छोटा-सा पुल भी बन गई। यह प्रयोग यह भी दिखाता है कि भारतीय सीफूड की पहचान केवल पारंपरिक भारतीय खानपान
तक सीमित नहीं है। इसे अलग-अलग बाजारों के स्वाद और खाना पकाने की परंपराओं के साथ
जोड़ा जा सकता है। यही लचीलापन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की ताकत बन सकता
है। यह भारत के लिए एक बड़ी संभावना है।
(अखिल पाराशर, CGTN हिन्दी संवाददाता, पेइचिंग)





