बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग: 142 सीटों पर मतदान, सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सियासी घमासान
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में बुधवार सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। शुरुआती घंटों में करीब 18% वोटिंग दर्ज की गई है। इस चरण में 7 जिलों की 142 सीटों पर कुल 3.21 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदाताओं में 1.64 करोड़ पुरुष, 1.57 करोड़ महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर वोटर शामिल हैं। चुनाव आयोग ने 41,001 मतदान केंद्र बनाए हैं, जहां हर बूथ पर वेबकास्टिंग और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से 2,321 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात की गई हैं।
VIP सीटों पर टक्कर, बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर
इस चरण में कई दिग्गज नेता मैदान में हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी भबानीपुर सीट से आमने-सामने हैं। इसके अलावा अभिषेक बनर्जी, फिरहाद हकीम, ज्योतिप्रिया मल्लिक और बीजेपी के अर्जुन सिंह जैसे कई बड़े चेहरे चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
हंगामे के बीच मतदान, EVM खराबी से नाराज मतदाता
मतदान के दौरान कई जगहों से गड़बड़ी की खबरें भी सामने आई हैं। बारानगर के एक बूथ पर ईवीएम खराब होने के कारण मतदान रोकना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मशीन को पांच बार बदला गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे मतदाताओं में नाराजगी देखी गई।
ममता बनर्जी का आरोप—‘मतदाताओं को डराया जा रहा’
मतदान के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मतदाताओं को डराया-धमकाया जा रहा है और विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं। वहीं अभिषेक बनर्जी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “केंद्र सरकार बंगाल में जरूरत से ज्यादा बल तैनात कर रही है।” उन्होंने दावा किया कि लाखों मतदाताओं को वोट डालने से रोका जा रहा है।
भबानीपुर में बढ़ा सियासी तापमान
भबानीपुर सीट पर सियासी हलचल और तेज हो गई जब सुवेंदु अधिकारी मतदान केंद्र के बाहर पहुंचे, जहां पहले से ममता बनर्जी मौजूद थीं। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण बना रहा और दोनों दलों के समर्थकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। एक ओर मध्य प्रदेश में एक हाई-प्रोफाइल हत्या केस में पुलिस की चूक न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है, वहीं दूसरी ओर बंगाल में लोकतंत्र का महापर्व आरोप-प्रत्यारोप और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच जारी है। दोनों घटनाक्रम अपने-अपने स्तर पर यह संकेत दे रहे हैं कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही ही जनता का भरोसा बनाए रखने की सबसे बड़ी कसौटी है।