सांदीपनि विद्यालय: सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर, मोहन सरकार का ‘क्लासरूम मॉडल’

Sandipani Vidyalaya The changing face of government schools the Mohan government classroom model

सरकारी स्कूल, कभी सीमित संसाधनों और सुविधाओं की पहचान माने जाते थे लेकिन मध्य प्रदेश में अब यही तस्वीर बदलने की कोशिश हो रही है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग, आधुनिक लैब, खेल और कौशल विकास। यानी सरकारी स्कूलों में भी वो सुविधाएं, जिन्हें अब तक निजी स्कूलों की ताकत माना जाता था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का महर्षि सांदीपनि विद्यालय मॉडल इसी बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रहा है। पहले चरण में 368 स्कूल और आगे 405 नए स्कूलों के विस्तार की तैयारी। तो क्या सांदीपनि विद्यालय सरकारी शिक्षा को नई पहचान देने जा रहे हैं?

क्या सरकारी स्कूल अब सिर्फ जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की मजबूरी नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की पहली पसंद बन सकते हैं? क्या सरकारी स्कूलों में भी स्मार्ट क्लास, आधुनिक लैब, डिजिटल लर्निंग, खेल और कौशल विकास जैसी सुविधाएं निजी स्कूलों को सीधी चुनौती दे सकती हैं? मध्य प्रदेश में डॉ.मोहन यादव की सरकार ने महर्षि सांदीपनि विद्यालयों का विस्तार इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को केवल भवनों और कमरों तक सीमित रखने के बजाय उसे आधुनिक सुविधाओं, तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में विकसित किए जा रहे महर्षि सांदीपनि विद्यालय सरकारी शिक्षा की बदलती तस्वीर का नया चेहरा बनकर सामने आ रहे हैं। सरकारी स्कूलों को आधुनिक स्वरूप देने की पहल पहले सीएम राइज स्कूलों के रूप में सामने आई थी। अब इसी व्यापक सोच को महर्षि सांदीपनि विद्यालयों के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है।
इन विद्यालयों का मकसद सिर्फ शानदार इमारतें तैयार करना नहीं है। असली लक्ष्य है—ऐसा शिक्षा वातावरण तैयार करना, जहां सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी तकनीक, प्रयोगशाला, खेल, कौशल और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं तक पहुंच बना सके।
यानी स्कूल की पहचान केवल ‘सरकारी’ होने से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और सुविधाओं से तय हो। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार सर्वसुविधायुक्त विद्यालयों के विस्तार पर जोर देते रहे हैं। सरकार की सोच है कि स्कूलों में भवन, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं और खेल सुविधाओं जैसी जरूरी व्यवस्थाओं की कमी नहीं रहने दी जाए। इसके साथ ही प्रदेश में पीएम श्री विद्यालयों के माध्यम से भी आधुनिक और उत्कृष्ट शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पूरे मॉडल को देखें तो सरकार की कोशिश तीन स्तरों पर दिखाई देती है—

पहला—बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर।
दूसरा—तकनीक आधारित शिक्षा।
तीसरा—बच्चों का सर्वांगीण विकास।

सांदीपनि विद्यालय योजना के प्रथम चरण में कुल 368 विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 274 विद्यालय स्कूल शिक्षा विभाग और 94 विद्यालय जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आते हैं। योजना के विस्तार का पैमाना बताता है कि सरकार इसे छोटे स्तर की पहल के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नया स्वरूप देने वाले मॉडल के तौर पर आगे बढ़ाना चाहती है। पहले चरण के 70 सांदीपनि विद्यालयों के नवनिर्मित भवन तैयार होकर लोकार्पण के स्तर पर पहुंच चुके हैं। इनमें 46 विद्यालय स्कूल शिक्षा विभाग और 24 विद्यालय जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत हैं। वहीं मार्च 2026 तक 97 विद्यालय अपने नवनिर्मित बड़े भवनों में स्थानांतरित हो चुके थे। सरकार की अगली योजना इससे भी बड़ी है। दूसरे चरण में 405 नए सांदीपनि विद्यालय स्थापित करने की दिशा में विस्तार प्रस्तावित है। यदि यह विस्तार तय योजना के अनुरूप होता है तो सांदीपनि विद्यालयों का नेटवर्क 773 स्कूलों तक पहुंच सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का कहना है प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त विद्यालयों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में बनने वाले भवन, स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाएं और खेल सुविधाएं सरकारी शिक्षा को नई पहचान देंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार स्कूलों में किसी भी जरूरी संसाधन की कमी नहीं रहने देगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त विद्यालयों का संचालन शुरू हो चुका है, जबकि पीएम श्री योजना के तहत विद्यालयों में भी आधुनिक और उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

सवाल सिर्फ स्कूल की नई बिल्डिंग का नहीं सवाल उस सोच को बदलने का है। जिसमें सरकारी स्कूल को कमतर समझा जाता रहा है। महर्षि सांदीपनि विद्यालयों के जरिए सरकार की कोशिश है कि गांव का बच्चा हो या शहर का, आर्थिक स्थिति चाहे जैसी हो। अवसर सबको बराबर मिले। स्मार्ट क्लास से STEM लैब तक, खेल से कौशल विकास तक, अगर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक व्यवस्था भी इसी रफ्तार से मजबूत होती है, तो सांदीपनि विद्यालय मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा का नया मॉडल बन सकते हैं। क्योंकि भविष्य सिर्फ बड़ी इमारतों में नहीं बनता भविष्य बनता है उस क्लासरूम में, जहां बच्चे को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर मिलता है।

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