बिहार को मिला नया चेहरा, OBC राजनीति का बड़ा दांव
बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब वे राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। तीन दशक से ज्यादा लंबे राजनीतिक सफर के बाद यह मुकाम उनके करियर का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। खास बात यह है कि वे ओबीसी समुदाय, खासकर कोईरी समाज से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में एक मजबूत सामाजिक आधार रखता है।
राबड़ी सरकार से शुरू हुआ सियासी सफर
आज भाजपा के बड़े चेहरे के तौर पर उभरे सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की थी। उन्होंने राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में 1999 में मंत्री पद की शपथ ली थी। उस दौर में वे सबसे युवा मंत्रियों में गिने जाते थे। हालांकि आयु विवाद के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा, लेकिन राजनीति में उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई।
RJD से NDA तक, बदलते गठबंधन के साथ मजबूत होती पहचान
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा। RJD में लंबे समय तक रहने के बाद उन्होंने बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच NDA का रुख किया। 2014 में जीतन राम मांझी की सरकार में भी उन्होंने मंत्री के रूप में काम किया। इसके बाद 2017 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और यहीं से उनके करियर ने नई रफ्तार पकड़ी।
बीजेपी में तेजी से उभार, संगठन से सरकार तक पकड़
भाजपा में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी को जल्द ही राज्य उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद वे विधान परिषद पहुंचे और फिर 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बने। उनकी संगठनात्मक क्षमता और आक्रामक राजनीतिक शैली के चलते उन्हें 2025 में बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया।
डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर
हाल के वर्षों में सम्राट चौधरी को बिहार की राजनीति में भाजपा का प्रमुख चेहरा माना जाने लगा। उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया और गृह मंत्रालय जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। अब विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो चुका है। यह बदलाव न सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नई सामाजिक रणनीति का संकेत भी है।
राजनीतिक विरासत का असर
सम्राट चौधरी का राजनीतिक बैकग्राउंड भी काफी मजबूत रहा है। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी विधायक रही हैं। यही वजह है कि राजनीति उनके लिए नई नहीं रही, बल्कि बचपन से ही वे इस माहौल में पले-बढ़े।
विवादों से भी रहा नाता
सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2023 में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा बयान देते हुए उनकी दाढ़ी की तुलना ओसामा बिन लादेन से की थी, जिससे राजनीतिक हलकों में काफी हंगामा हुआ। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि देश को असली आजादी 1977 में जेपी आंदोलन के बाद मिली, जिस पर भी विवाद खड़ा हुआ।
पगड़ी की प्रतिज्ञा से सत्ता तक
सम्राट चौधरी अपनी ‘पगड़ी राजनीति’ को लेकर भी चर्चा में रहे। जब जेडीयू ने भाजपा से नाता तोड़ा था, तब उन्होंने पगड़ी पहनकर यह प्रण लिया था कि जब तक भाजपा दोबारा सत्ता में नहीं आएगी, वे इसे नहीं उतारेंगे। बाद में जब नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी की, तो उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया और अयोध्या में राम मंदिर दर्शन के बाद उन्होंने अपनी पगड़ी उतारी।
निजी जीवन और शिक्षा
16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले में जन्मे सम्राट चौधरी ने मदुरई कामराज विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। उनका विवाह 2007 में ममता चौधरी से हुआ और उनके दो बच्चे हैं। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक व्यक्ति का उभार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में सामाजिक समीकरणों के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। RJD से BJP तक का उनका सफर यह दिखाता है कि वे बदलते राजनीतिक हालात के साथ खुद को ढालने में माहिर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे मुख्यमंत्री के रूप में बिहार को नई दिशा दे पाएंगे या सियासी चुनौतियां उनके सामने बड़ी परीक्षा बनकर खड़ी होंगी।
RJD से BJP तक कैसे पार्टी में मजबूत नेता बनकर उभरे सम्राट चौधरी
Samrat Choudhary का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन बीजेपी में आने के बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। शुरुआती दौर में वे आरजेडी से जुड़े रहे और गठबंधन सरकार में मंत्री के रूप में काम किया। साल 2018 में उन्होंने आरजेडी का साथ छोड़कर बीजेपी जॉइन की, जिसके बाद उनके करियर ने नई दिशा पकड़ी। एनडीए सरकार में उन्हें पंचायती राज मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने संगठन और प्रशासन दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की। खास बात यह रही कि वे लंबे समय तक Nitish Kumar के मुखर आलोचक रहे और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर विरोध भी जताया। मार्च 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत और बढ़ी। इसके बाद जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार एनडीए में लौटे, तो सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस तरह उन्होंने बीजेपी में एक प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बना ली।