मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: क्या अरब देश भी कूदेंगे जंग में?…जानें अरब देशों का रुख क्यों बदल सकता है?

Rising tensions in the Middle East

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: क्या अरब देश भी कूदेंगे जंग में?

ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव अब एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने की आशंका पैदा कर रहा है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ताज़ा बयान ने हलचल और तेज कर दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि कुछ अरब देशों के साथ नए गठबंधन बन रहे हैं, जो इजरायल के साथ खड़े हो सकते हैं।

नेतन्याहू का बड़ा दावा

बेंजामिन नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि:

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है।

क्या है पूरा बैकग्राउंड?

इससे संकेत मिलता है कि मामला अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रह सकता।

अरब देशों का रुख क्यों बदल सकता है?

परंपरागत रूप से कई अरब देश इजरायल के विरोधी रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में हालात बदले हैं:

ऐसे में “दुश्मन का दुश्मन दोस्त” वाली स्थिति बनती दिख रही है।

क्या सच में जंग में उतरेंगे अरब देश?

फिलहाल स्थिति साफ नहीं है, लेकिन कुछ संभावनाएं हैं:

सीधे सैन्य सहयोग

 परोक्ष समर्थन

खुली जंग में उतरना

खतरा कितना बड़ा है?

अगर अरब देश सीधे इस संघर्ष में शामिल होते हैं, तो ऐसे में हालात बदले तो आने वाले समय में पूरा का पूरा मिडिल ईस्ट भी इस घातक युद्ध की चपेट में आ सकता है। तेल सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की सीधी भागीदारी बेंजामिन नेतन्याहू के बयान ने साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि अरब देश खुलकर जंग में उतरेंगे, लेकिन गठबंधन की राजनीति इस संघर्ष को और जटिल जरूर बना रही है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह लड़ाई सीमित रहेगी या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगी।

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