न्याय की लड़ाई के लिए राजनीति चुनी’: RG Kar कांड की मां रत्ना देबनाथ बनीं जनता की आवाज, बंगाल में दर्ज की ऐतिहासिक जीत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में एक ऐसी जीत सामने आई है, जिसने राजनीति को भावनाओं, संघर्ष और न्याय की मांग से जोड़ दिया है। पानीहाटी सीट से भाजपा उम्मीदवार Ratna Debnath ने 28,836 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर सबका ध्यान खींच लिया है। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि एक मां के दर्द से निकली आवाज का जनसमर्थन भी है।

दर्द से राजनीति तक का सफर जिसने एक आम मां को बना दिया न्याय की सबसे मजबूत आवाज

रत्ना देबनाथ की जिंदगी 9 अगस्त 2024 के बाद पूरी तरह बदल गई, जब उनकी 31 वर्षीय बेटी ‘अभया’ का शव कोलकाता के RG Kar Medical College के एक कमरे में मिला। इस जघन्य घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते-करते रत्ना ने राजनीति का रास्ता चुना, ताकि वे अपनी आवाज को और मजबूत बना सकें।

पानीहाटी जैसे मजबूत गढ़ में जीत हासिल कर टीएमसी को दिया बड़ा झटका

पानीहाटी लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन इस बार जनता ने बदलाव का फैसला किया। रत्ना देबनाथ ने टीएमसी उम्मीदवार तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों से हराकर सीट पर कब्जा जमाया। उनकी इस जीत को महिला मतदाताओं के समर्थन और न्याय की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।

‘महिलाओं ने जवाब दे दिया’: जीत के बाद रत्ना देबनाथ का बड़ा बयान

अपनी जीत के बाद रत्ना देबनाथ ने कहा कि यह परिणाम बंगाल की महिलाओं का जवाब है। उनका मानना है कि अब महिलाएं सिर्फ योजनाओं या आर्थिक मदद से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनकी यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस मां और बेटी की है जो न्याय चाहती है।

सरकार पर गंभीर आरोप और न्याय की लड़ाई को राजनीति से जोड़ने का फैसला

रत्ना देबनाथ ने पहले भी राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी ने अपने अस्पताल में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे राजनीति के जरिए इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगी और दोषियों को सजा दिलाने तक रुकेंगी नहीं।

व्यक्तिगत शोक से सामाजिक संघर्ष तक, एक मां की कहानी बनी पूरे समाज का मुद्दा

रत्ना देबनाथ ने बताया कि उन्होंने इस घटना के बाद से अपने बाल तक नहीं संवारे, जो उनके शोक और विरोध का प्रतीक है। वे अपनी बेटी को “भगवान का दिया अनमोल हीरा” मानती हैं और कहती हैं कि यह सिर्फ उनका नहीं, पूरे समाज का नुकसान है। उनकी जीत को लोग न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं।

 

 

 

 

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