12 साल में बदली सियासत की तस्वीर: राम मंदिर से नक्सल मुक्त भारत तक BJP के बड़े वादे पूरे
2014 के चुनावी वादों से 2026 की उपलब्धियों तक—मोदी सरकार के बड़े फैसलों और उनके असर की पूरी कहानी
2014 से शुरू हुआ बदलाव का दौर
16 मई 2014 भारतीय राजनीति का एक अहम दिन था, जब लोकसभा चुनाव के नतीजों ने सत्ता का पूरा समीकरण बदल दिया। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। यह पहली बार था जब बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत लेकर सत्ता में आई। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने कई बड़े वादे किए थे, जो आने वाले वर्षों में उसकी राजनीति का केंद्र बने।
राम मंदिर का सपना हुआ साकार
बीजेपी के सबसे पुराने और बड़े वादों में से एक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण था। वर्षों तक चले राजनीतिक और कानूनी संघर्ष के बाद यह सपना साकार हुआ। राम मंदिर का निर्माण न सिर्फ एक धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसे बीजेपी की सबसे बड़ी वैचारिक जीत के रूप में भी देखा गया। इससे पार्टी ने अपने कोर वोट बैंक के बीच मजबूत पकड़ बनाई।
धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना भी बीजेपी के प्रमुख वादों में शामिल था। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने यह बड़ा फैसला लेते हुए राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। इस कदम को सरकार ने राष्ट्रीय एकता की दिशा में बड़ा निर्णय बताया, जबकि विपक्ष ने इसे संवैधानिक बहस का विषय बनाया।
तीन तलाक कानून से सामाजिक बदलाव
महिलाओं के अधिकारों को लेकर मोदी सरकार ने तीन तलाक पर भी सख्त रुख अपनाया। तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित कर कानून बनाया गया। सरकार का कहना था कि यह फैसला मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में उठाया गया कदम है। इस कानून के बाद तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा पर रोक लगी और इसे सामाजिक सुधार के रूप में पेश किया गया।
नक्सल मुक्त भारत की ओर बढ़ते कदम
अब मोदी सरकार जिस बड़े लक्ष्य के करीब पहुंचती दिख रही है, वह है नक्सल मुक्त भारत। नक्सलवाद लंबे समय तक देश के कई राज्यों में आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बना रहा। सरकार ने सुरक्षा अभियानों, विकास योजनाओं और पुनर्वास नीतियों के जरिए इस पर काबू पाने की रणनीति अपनाई। हाल के वर्षों में नक्सल घटनाओं में आई कमी को इसी दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।
विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी खास ध्यान दिया। सड़क, रेल, एयरपोर्ट और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। सरकार ने ‘न्यू इंडिया’ के विजन के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास की रीढ़ के रूप में प्रस्तुत किया।
गरीब कल्याण योजनाओं का विस्तार
सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं शुरू कीं। उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना जैसी योजनाओं के जरिए करोड़ों लोगों को सीधा लाभ पहुंचाने का दावा किया गया। इन योजनाओं ने बीजेपी की “वेलफेयर पॉलिटिक्स” को मजबूती दी।
डिजिटल इंडिया और नई अर्थव्यवस्था
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश में डिजिटल लेनदेन और तकनीकी पहुंच को बढ़ावा दिया गया। यूपीआई, आधार और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने भारत को तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाया। इससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ने का दावा किया गया।
विदेश नीति में मजबूत छवि
मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति को भी नए आयाम मिले। वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रियता बढ़ी और कई देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत हुए। सरकार ने इसे “मजबूत भारत” की पहचान के रूप में पेश किया।
विपक्ष के सवाल और बहस जारी
हालांकि इन उपलब्धियों के साथ-साथ विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल भी उठाता रहा है। रोजगार, महंगाई और सामाजिक मुद्दों को लेकर आलोचना होती रही है। कई फैसलों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस भी देखने को मिली।
वादों से हकीकत तक का सफर
कुल मिलाकर देखा जाए तो 2014 में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में मोदी सरकार ने कई बड़े और निर्णायक कदम उठाए हैं। राम मंदिर, धारा 370, तीन तलाक और अब नक्सल मुक्त भारत की ओर बढ़ते कदम—ये सभी उस राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं, जिसके साथ बीजेपी सत्ता में आई थी।
आगे की राह और नई चुनौतियां
अब जब सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में प्रवेश कर चुकी है, तो आगे की चुनौतियां और भी बड़ी हैं। आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकता होंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में सरकार अपने नए वादों को किस तरह पूरा करती है।