Strait of Hormuz:होर्मुज में युद्ध का नया मोर्चा: ईरान के मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, भारतीय की मौत से बढ़ा तनाव

New war front in Hormuz US

 

मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब एक नए और बेहद खतरनाक दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान और अमेरिका के बीच सीधा सैन्य टकराव तेज हो गया है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत आठ लोग घायल बताए गए हैं। इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर करीब पांच घंटे तक बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।

  1. UAE टैंकर पर मिसाइल हमला
  2. भारतीय नागरिक की दर्दनाक मौत
  3. अमेरिका ने 5 घंटे बरसाए बम
  4. बहरीन-जॉर्डन तक फैला संघर्ष
  5. होर्मुज पर वैश्विक टकराव गहराया

UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘मोंबासा’ और ‘अल बहिया’ नाम के तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तभी उन पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में जहाज पर सवार एक भारतीय नागरिक की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। भारतीय नागरिक की पहचान और वह किस राज्य का रहने वाला था, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस घटना ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि होर्मुज मार्ग से बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और समुद्री कर्मचारी भी जुड़े हुए हैं।

दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित अल-जुफैर सैन्य अड्डे, अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट के ठिकाने और जॉर्डन के एक एयरबेस पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका के बढ़ते सैन्य हस्तक्षेप के जवाब में की गई। हालांकि इन हमलों में हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

ईरानी हमलों के बाद अमेरिका ने भी तत्काल जवाबी सैन्य अभियान शुरू किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक करीब पांच घंटे तक चले अभियान में ईरान के बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों में ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन अड्डों और नौसैनिक क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा रणनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि अब अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएगा। इसके बदले इस मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक कार्गो जहाज से 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लिया जाएगा। साथ ही ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की भी घोषणा की गई है।

हालांकि ट्रम्प के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। समुद्री कानून के जानकारों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) और इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के नियमों के अनुसार किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर एकतरफा टोल या शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ऐसा करता है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून की भावना के खिलाफ माना जाएगा।

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने भी अमेरिकी प्रस्ताव की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों पर इस तरह शुल्क वसूलना समुद्री डकैती जैसी सोच को बढ़ावा देता है और यह वैश्विक व्यापार के लिए गलत संदेश है।

उधर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना प्रभाव और नियंत्रण कमजोर नहीं होने देगा। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कहा कि अमेरिका के दबाव में ईरान पीछे हटने वाला नहीं है और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अपने हितों की रक्षा करता रहेगा।

तनाव के बीच जॉर्डन ने भी पुष्टि की है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर रही ईरान की चार मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से मार गिराया। वहीं ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को भी निशाना बनाया है, हालांकि अमेरिका ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि हालिया सैन्य कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार कई सैन्य जहाज, विमान, रडार सिस्टम और हथियार निर्माण क्षमता नष्ट कर दी गई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। दुनिया के लगभग एक-पांचवें हिस्से का कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि यहां सैन्य टकराव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, समुद्री व्यापार में बाधा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए भी यह स्थिति आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मध्य-पूर्व में तेजी से बदलते हालात अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर नई रणनीति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून पर उठते सवाल आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही, भारतीय नागरिक की मौत ने इस संघर्ष के मानवीय पहलू को भी दुनिया के सामने ला दिया है।

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