कमजोर बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता
372 जिलों में मानसून का असर, 68 सबसे ज्यादा प्रभावित
खरीफ बुआई में एक करोड़ हेक्टेयर की कमी
14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे शिवराज
20 जुलाई के बाद मानसून में सुधार की उम्मीद
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 10 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों की बुआई 531.25 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 101.44 लाख हेक्टेयर कम है। सबसे अधिक गिरावट तिलहन, दलहन और धान की बुआई में दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 जुलाई तक अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी रह सकती हैं, हालांकि इसके बाद मानसून के फिर सक्रिय होने की संभावना है। यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो खरीफ उत्पादन पर असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह राज्यों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी।
- 372 जिलों में कमजोर मानसून, खेती पर संकट गहराया
- बारिश की 19% कमी, खरीफ बुआई में बड़ा नुकसान
- 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से करेंगे चर्चा शिवराज सिंह चौहान
- 20 जुलाई तक राहत के आसार कम, किसानों की बढ़ी चिंता
- सरकार अलर्ट, फसल बचाने की रणनीति पर मंथन
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसूनकी धीमी रफ्तार अब किसानों की सबसे बड़ी चिंता बनती जा रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार सरकार ने अप्रैल महीने से ही संभावित मौसमीय चुनौतियों को देखते हुए राज्यों के साथ समन्वय शुरू कर दिया था। अब जब कई इलाकों में बारिश उम्मीद से कम हुई है, तो कृषि विभाग और राज्य सरकारों के बीच लगातार संवाद बनाए रखा जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान इससे पहले भी प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक कर चुके हैं। अब ताजा हालात को देखते हुए फिर से रणनीति तैयार की जा रही है ताकि खरीफ सीजन को अधिक नुकसान से बचाया जा सके।
बारिश की कमी बढ़कर 19 प्रतिशत
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 13 जुलाई 2026 तक पूरे देश में सामान्य से 19 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे अधिक प्रभावित पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत रहा है, जहां सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 22 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 12 प्रतिशत तथा मध्य भारत में 8 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।
कम बारिश का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जलाशयों के जलस्तर, सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कई राज्यों में किसान पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण बुआई टालने को मजबूर हैं।
खरीफ बुआई में एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक की कमी
कमजोर मानसून का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 10 जुलाई 2026 तक देशभर में 531.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 632.69 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार अब तक 101.44 लाख हेक्टेयर (करीब 16 प्रतिशत) कम क्षेत्र में बुआई हो सकी है।
फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो धान की बुआई में 10.84 लाख हेक्टेयर, दलहन में 17.22 लाख हेक्टेयर और तिलहन में 31.34 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव आगे चलकर खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
20 जुलाई तक राहत की उम्मीद कम
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश मैदानी इलाकों में भारी बारिश की संभावना कम है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उप-हिमालयी क्षेत्रों में अगले तीन से चार दिनों तक कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिम भारत, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय राज्यों में अगले छह से सात दिनों तक वर्षा की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 20 जुलाई के बाद मानसून दोबारा सक्रिय होता है तो खरीफ बुआई में कुछ हद तक सुधार संभव है। चूंकि इस बार कई क्षेत्रों में बुआई का समय अगस्त के मध्य तक बढ़ाया गया है, इसलिए किसानों के पास अभी भी कुछ अवसर मौजूद हैं।
किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों पर पड़ रहा है। धान, सोयाबीन, मक्का, अरहर, उड़द और तिलहन जैसी खरीफ फसलें समय पर बारिश पर निर्भर करती हैं। कई राज्यों में किसान पहली बारिश के बाद खेत तैयार कर चुके थे, लेकिन लगातार वर्षा नहीं होने से अंकुरण और फसल वृद्धि प्रभावित हो रही है।
यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं होती तो किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी। साथ ही सिंचाई की व्यवस्था करने वाले किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका भी है।
सरकार की रणनीति पर नजर
केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों को राहत देने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। कृषि मंत्रालय राज्यों के साथ लगातार संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर बीज उपलब्ध कराने, वैकल्पिक फसलें अपनाने, सिंचाई प्रबंधन और अन्य राहत उपायों पर भी काम किया जाएगा। 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली बैठक में प्रत्येक राज्य की स्थिति का अलग-अलग आकलन किया जाएगा, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिए जा सकें।
फिलहाल देश की नजर आसमान पर टिकी है। यदि अगले कुछ दिनों में मानसून फिर सक्रिय होता है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में आने वाले दो सप्ताह खरीफ सीजन और देश के करोड़ों किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। (प्रकाश कुमार पाण्डेय)