Thursday, June 11, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home मुख्य समाचार

मोदी सरकार के 12 साल: नेहरू से मोदी तक..जानें कैसे और कितनी बदली भारत की विदेश नीति की दिशा और दृष्टि?

DigitalDesk by DigitalDesk
June 11, 2026
in मुख्य समाचार
0
मोदी सरकार के 12 साल: नेहरू से मोदी तक..जानें कैसे और कितनी बदली भारत की विदेश नीति की दिशा और दृष्टि?
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

भारत की विदेश नीति केवल देशों के बीच संबंधों का विषय नहीं है, बल्कि यह उस दृष्टि का प्रतिबिंब होती है जिसके माध्यम से कोई राष्ट्र स्वयं को और दुनिया में अपनी भूमिका को देखता है। आज जब नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभालते हुए स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नया रिकॉर्ड बनाया है, तब यह स्वाभाविक है कि उनकी विदेश नीति की तुलना देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से की जाए।

भारत की कूटनीति का नया अध्याय
पुरानी विरासत का विस्तार?

Related posts

Stock Market Updates: शेयर बाजार में लौटी रौनक: सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा उछला, निवेशकों ने ली राहत की सांस

शेयर बाजार में हाहाकार! अमेरिका-ईरान तनाव से टूटा बाजार, निवेशकों के करोड़ों रुपये डूबे

June 11, 2026
Gold Silver Price Today: लगातार तीसरे दिन टूटा सोना-चांदी, खरीदारी करने वालों के लिए बना सुनहरा मौका

Gold Silver Price Today: सोना-चांदी खरीदारों के लिए राहत, लगातार गिरावट के बाद नीचे आए भाव, जानिए आपके शहर का ताजा रेट

June 11, 2026

यह तुलना केवल दो नेताओं की नहीं, बल्कि दो अलग-अलग युगों, दो विचारधाराओं और भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर दो दृष्टिकोणों की भी है। सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार ने भारत की विदेश नीति की दिशा बदल दी है या यह नेहरू की स्थापित नींव का ही विकसित रूप है?

नेहरू का भारत: नवस्वतंत्र राष्ट्र की आवाज

1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहचान स्थापित करने की थी। नेहरू ने भारत को एक आधुनिक, लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक सोच वाले राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। उनकी विदेश नीति का मूल आधार था गुटनिरपेक्षता, उपनिवेशवाद विरोध और विश्व शांति।

शीत युद्ध के दौर में जब दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ के दो खेमों में बंटी हुई थी, तब भारत ने किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने से इनकार किया। नेहरू का मानना था कि भारत की ताकत उसकी स्वतंत्र विदेश नीति में है। उन्होंने नवस्वतंत्र देशों की आवाज बनकर एशिया और अफ्रीका में भारत की प्रतिष्ठा स्थापित की। नेहरू के लिए भारत की महानता उसकी लोकतांत्रिक संस्थाओं, आधुनिक विकास मॉडल और नैतिक नेतृत्व में निहित थी। यही कारण था कि उनकी विदेश नीति आदर्शवाद और वैश्विक नैतिकता से प्रेरित दिखाई देती है।

मोदी का भारत: सभ्यतागत आत्मविश्वास की कूटनीति

2014 के बाद भारत की विदेश नीति में एक स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है। मोदी सरकार ने भारत को केवल एक राष्ट्र-राज्य के रूप में नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसे विचारों को प्रमुखता देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जाता है। जी-20 शिखर सम्मेलन की थीम ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ इसी सोच को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का प्रयास था। मोदी सरकार की विदेश नीति में सांस्कृतिक कूटनीति, प्रवासी भारतीयों के साथ जुड़ाव और भारत की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर विशेष जोर दिखाई देता है। यह दृष्टिकोण नेहरू की आधुनिकतावादी सोच से अलग माना जाता है।

गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखण तक

नेहरू के दौर में गुटनिरपेक्षता विदेश नीति की आधारशिला थी। लेकिन आज की दुनिया शीत युद्ध वाली दुनिया नहीं है। अमेरिका, चीन, रूस, यूरोप और उभरती शक्तियों के बीच संतुलन बनाना आधुनिक कूटनीति की आवश्यकता बन चुका है।

मोदी सरकार ने इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बहु-संरेखण Multi-Alignment की रणनीति अपनाई। भारत एक ओर अमेरिका के साथ रक्षा और तकनीकी साझेदारी मजबूत करता है, तो दूसरी ओर रूस के साथ पारंपरिक संबंध बनाए रखता है। साथ ही ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन और क्वाड जैसे विभिन्न मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाता है। यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी। यही रणनीतिक स्वायत्तता आज भारत की विदेश नीति की नई पहचान बन चुकी है।

चीन और सुरक्षा नीति में बदलाव

विदेश नीति के सबसे बड़े बदलावों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दिखाई देता है। नेहरू के दौर में चीन के साथ ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का दौर था, लेकिन 1962 का युद्ध भारत के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। मोदी सरकार के समय चीन के साथ संबंधों में प्रतिस्पर्धा और सतर्कता दोनों दिखाई देती हैं। गलवान संघर्ष के बाद भारत ने सीमा पर सैन्य ढांचे को मजबूत किया, चीनी निवेशों की समीक्षा की और रणनीतिक साझेदारियों को विस्तार दिया।

आज भारत केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और सामरिक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

वैश्विक संकटों में भारत की भूमिका

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान के तहत दर्जनों देशों को टीके उपलब्ध कराए। इससे भारत की छवि एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में मजबूत हुई। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, यूपीआई और आपदा राहत अभियानों के माध्यम से भारत ने अपनी सॉफ्ट पावर को नई ऊंचाई दी है। जहां नेहरू के समय भारत नैतिक नेतृत्व का दावा करता था, वहीं मोदी काल में भारत समाधान देने वाले राष्ट्र के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है।

क्या वास्तव में बदल गई है विदेश नीति?

हालांकि दोनों नेताओं की शैली और प्राथमिकताएं अलग हैं, लेकिन कुछ मूल तत्व आज भी समान हैं। राष्ट्रीय हितों की रक्षा, रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक मंचों पर भारत की प्रभावशाली भूमिका दोनों ही दौरों की साझा विशेषताएं हैं। अंतर केवल इतना है कि नेहरू ने भारत को एक नवस्वतंत्र लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया, जबकि मोदी भारत को एक प्राचीन सभ्यता और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

इस दृष्टि से देखा जाए तो भारत की विदेश नीति में बदलाव केवल रणनीति का नहीं, बल्कि आत्मबोध का भी है। भारत अब केवल विश्व राजनीति का सहभागी नहीं बनना चाहता, बल्कि उसे आकार देने वाली शक्तियों में शामिल होने की आकांक्षा रखता है।

नेहरू और मोदी की विदेश नीतियां दो अलग-अलग युगों की उपज हैं। नेहरू ने स्वतंत्र भारत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई, जबकि मोदी उस पहचान को प्रभाव और नेतृत्व में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। एक ने राष्ट्र निर्माण की कूटनीति दी, दूसरे ने सभ्यतागत आत्मविश्वास की। इन 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति अधिक आत्मविश्वासी, बहुआयामी और परिणामोन्मुख दिखाई देती है। हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं—चीन, पाकिस्तान, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरण—लेकिन इतना स्पष्ट है कि भारत की कूटनीति अब केवल प्रतिक्रिया देने वाली नहीं, बल्कि एजेंडा तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यही शायद मोदी काल की विदेश नीति का सबसे बड़ा परिवर्तन है।

Post Views: 56
Tags: #NarendraModi #JawaharlalNehru #ForeignPolicy #IndiaDiplomacy #ModiGovernment #Nehru #GlobalPolitics #IndiaOnWorldStage
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

TMC में भगदड़! तीसरे राज्यसभा सांसद ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

TMC में भगदड़! तीसरे राज्यसभा सांसद ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

TMC में भगदड़! तीसरे राज्यसभा सांसद ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

मुख्य समाचार
सिद्धारमैया की कुर्सी पर सस्पेंस, DK शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग से बढ़ी हलचल

सिद्धारमैया की कुर्सी पर सस्पेंस, DK शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग से बढ़ी हलचल

मुख्य समाचार
बंगाल की राजनीति में मचा बड़ा घमासान, TMC में टूट की चर्चा तेज!

बंगाल की राजनीति में मचा बड़ा घमासान, TMC में टूट की चर्चा तेज!

मुख्य समाचार

RSS Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version