मैथिली ठाकुर के सवालों में घिरे मंत्री मंगल पांडेय का सम्राट कैबिनेट से पत्ता साफ

Maithili Thakur

मैथिली ठाकुर के सवालों में घिरे मंत्री मंगल पांडेय का सम्राट कैबिनेट से पत्ता साफ

बिहार मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी के तीन पुराने चेहरों की छुट्टी, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवालों के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा

पटना। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजनीतिक हलकों में कई चर्चाएं तेज हो गई हैं। गुरुवार को हुए कैबिनेट विस्तार में जहां 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, वहीं बीजेपी के कुछ पुराने और प्रभावशाली चेहरों को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को लेकर हो रही है।

मंगल पांडेय का नाम इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि कुछ महीने पहले विधानसभा के बजट सत्र में बीजेपी विधायक और लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग की बदहाल व्यवस्था को लेकर उन्हें सदन में घेर लिया था। उस दौरान अस्पतालों की जर्जर स्थिति पर दिए गए मंत्री के जवाब से मैथिली ठाकुर संतुष्ट नहीं दिखाई दी थीं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे थे तीखे सवाल

दरअसल, इसी साल फरवरी में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मैथिली ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के अस्पतालों की खराब हालत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने सदन में कहा था कि अस्पताल की इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया था कि अस्पतालों की छतों से प्लास्टर गिर रहा है, दीवारों में दरारें हैं और बरसात के मौसम में वार्डों में पानी टपकता है। मैथिली ठाकुर ने सवाल किया था कि जब हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ाया जा रहा है तो फिर अस्पतालों की हालत सुधर क्यों नहीं रही।

मंत्री के जवाब से नहीं हुईं संतुष्ट

तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने जवाब देते हुए कहा था कि राज्य सरकार अस्पतालों की स्थिति को लेकर गंभीर है और कई जगह नई इमारतों के निर्माण को मंजूरी दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा था कि कई परियोजनाओं पर काम जारी है। हालांकि मैथिली ठाकुर ने मंत्री के जवाब पर तुरंत आपत्ति जताई थी। उन्होंने सदन में कहा था कि उनके क्षेत्र का अस्पताल वर्षों से योजनाओं की सूची में शामिल है, लेकिन आज तक न मरम्मत हुई और न नई बिल्डिंग बनी। उन्होंने साफ कहा था कि कागजों में योजनाएं जरूर दिखाई देती हैं, लेकिन जमीन पर हालात बेहद खराब हैं। मैथिली ठाकुर ने यह भी कहा था कि मरीज और उनके परिजन डर के माहौल में इलाज कराने को मजबूर हैं।

सदन में गरमा गया था माहौल

मैथिली ठाकुर के लगातार सवालों के बाद विधानसभा का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया था। विपक्ष ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की थी। उस समय यह मामला काफी चर्चा में रहा था और राजनीतिक गलियारों में इसे बीजेपी के भीतर असंतोष के संकेत के रूप में भी देखा गया था। अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई सरकार में मंगल पांडेय को जगह नहीं मिलने के बाद उस पूरे घटनाक्रम की फिर चर्चा होने लगी है। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई वजह सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे प्रदर्शन और संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

बीजेपी के तीन पुराने मंत्रियों की छुट्टी

नई कैबिनेट में बीजेपी ने इस बार कई नए चेहरों को मौका दिया है। वहीं तीन पुराने मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। मंगल पांडेय के अलावा पूर्व मंत्री नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। नारायण प्रसाद पहले आपदा प्रबंधन और पर्यटन जैसे विभाग संभाल चुके हैं, जबकि सुरेंद्र मेहता पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रह चुके थे। इन नेताओं की छुट्टी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

नई टीम से बड़े बदलाव की उम्मीद

सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को आगामी राजनीतिक रणनीति और प्रशासनिक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी और जेडीयू ने इस बार युवा चेहरों, महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई कैबिनेट के जरिए जनता के बीच बेहतर संदेश देने और सरकार की कार्यशैली में बदलाव दिखाने की कोशिश की गई है। अब देखना होगा कि नई टीम स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर कितना प्रभावी काम कर पाती है।

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