Middle East Impact : भारत में अस्पताल के बिल और दवाएँ हो सकती हैं महँगी

लगभग हर दूसरे सेक्टर की तरह, भारत का हेल्थकेयर सेक्टर पर भी ईरान में चल रहे युद्ध के अप्रत्यक्ष प्रभाव दिखने लगे हैं। हालांकि, नियमित मेडिकल सेवाओं में अभी तक कोई बड़ी रुकावट नहीं आई है, लेकिन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ जैसे शिपिंग रास्ते लंबे समय तक बाधित रहते हैं, तो इस संकट का असर आखिरकार हेल्थ सेक्टर और फिर मरीज की सेहत पर पड़ेगा।

मेडिकल डिवाइस और फार्मा सेक्टर का कच्चा माल होता है आयात

भारत के मेडिकल डिवाइस और फार्मा सेक्टर कच्चे माल, एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और उनके खास कंपोनेंट्स—जिनमें प्लास्टिक और इंटरमीडिएट केमिकल्स शामिल हैं इसका एक बड़ा हिस्सा आयात करते हैं। अहम व्यापारिक रास्तों पर देरी, ज़्यादा माल-भाड़ा और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण, हेल्थकेयर कंपनियों के लिए लागत बढ़ रही है। सिरिंज, दस्ताने, कैथेटर और अन्य इस्तेमाल होने वाली चीज़ों के निर्माता पहले से ही ज़्यादा समय लगने और लागत बढ़ने की शिकायत कर रहे हैं, भले ही अभी पूरी तरह से चीज़ों की कमी न हुई हो लेकिन अलर यु्द्द के हालात यही रहे तो दामों में तेजी से इजाफा हो सकता है।

कच्चा माल आयात किए जाने से बढ रही है लागत लागत
जानकारो की माने तो “अभी इसका रोज़मर्रा की सेवाओं पर कोई असर दिखआई नहीं दे रहा। लेकिन युद्ध की वजह से सिस्टम पर परोक्ष दबाव ज़रूर होगा। फिलहाल तक इसका असर मरीजों की जेब तक नहीं गया क्योंकिअभी पहले से ही काफी स्टॉक मौजूद है, लेकिन अगर युद्द लंबा चलता है तो लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर मरीज़ों पर पड़ेगा।”

मरीजों पर प्रभाव: यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है
लागत वृद्धि का बोझ ग्राहकों पर डाला जाता है, तो स्वास्थ्य संबंधी उपभोग्य सामग्रियों और कुछ दवाओं की कीमतों में धीरे-धीरे वृद्धि होगी।
निदान और अस्पताल देखभाल में उपयोग होने वाले आयातित उपकरणों या घटकों के लिए प्रतीक्षा समय बढ़ सकता है या वितरण में देरी हो सकती है।
यात्रा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच मरीजों द्वारा यात्रा योजनाओं में बदलाव के कारण चिकित्सा पर्यटन और वैकल्पिक देखभाल में परिवर्तन आ सकता है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख शिपिंग कॉरिडोर के आसपास आपूर्ति में लगातार व्यवधान से उत्पादन लागत में अनिवार्य रूप से वृद्धि होगी। हालांकि भारतीय कंपनियां अभी इसका कुछ हिस्सा वहन कर रही हैं, लेकिन लंबे समय तक अस्थिरता रहने से मरीजों के लिए लागत और भी बढ़ सकती है।

Exit mobile version