America Political Black Hole: अमेरिका का ‘राजनीतिक ब्लैक होल’ या मिथक? इजरायल से टकराने वाले नेताओं की कहानी

Story of Leaders Who Clashed with Israel

क्या इजरायल पर सवाल उठाना अमेरिकी नेताओं के लिए राजनीतिक जोखिम बन जाता है?

वॉशिंगटन। अमेरिकी राजनीति में इजरायल का मुद्दा सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घरेलू राजनीति, चुनावी रणनीति और शक्ति संतुलन से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। दशकों से यह धारणा बनी हुई है कि जो भी अमेरिकी नेता इजरायल की नीतियों की खुलकर आलोचना करता है या उस पर दबाव बनाने की कोशिश करता है, उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी चुनावी हार या राजनीतिक गिरावट का कारण केवल इजरायल नहीं होता, लेकिन यह मुद्दा कई बार नेताओं के लिए अतिरिक्त चुनौती जरूर बन जाता है।

जिमी कार्टर: शांति दूत से विवादित नेता तक

Jimmy Carter ने 1978 में मिस्र और इजरायल के बीच ऐतिहासिक कैंप डेविड समझौता कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस उपलब्धि ने उन्हें वैश्विक स्तर पर शांति दूत की पहचान दिलाई। लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने वेस्ट बैंक और गाजा में इजरायली बस्तियों की आलोचना की और फिलिस्तीनियों के अधिकारों की वकालत की।

उनके इस रुख को अमेरिका के कई इजरायल समर्थक समूहों ने नकारात्मक रूप से देखा। 1980 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उनकी हार के पीछे ईरान बंधक संकट और आर्थिक समस्याएं भी बड़ी वजह थीं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल को लेकर उनका रुख भी विवाद का कारण बना।

जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश और 10 अरब डॉलर का विवाद

George H. W. Bush ने 1991 में इजरायल को प्रस्तावित 10 अरब डॉलर की ऋण गारंटी को वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार से जोड़ने की कोशिश की। इस कदम के बाद वॉशिंगटन में तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई।

बुश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद को “One Lonely Little Guy” बताया था, जिससे संकेत मिला कि वे प्रभावशाली लॉबिंग समूहों के दबाव का सामना कर रहे हैं। अगले वर्ष वे चुनाव हार गए। हालांकि आर्थिक मंदी उनकी हार का प्रमुख कारण मानी जाती है, लेकिन इजरायल से जुड़ा विवाद भी चर्चा का विषय बना रहा।

ओबामा और नेतन्याहू के बीच खुला टकराव

Barack Obama और Benjamin Netanyahu के बीच संबंध भी कई मौकों पर तनावपूर्ण नजर आते रहे है। विशेष तौर पर ईरान परमाणु समझौते को लेकर इन दोनों ही नेताओं के बीच मतभेद कई बार खुलकर सामने आए। 2015 में नेतन्याहू ने अमेरिकी कांग्रेस में भाषण देकर ओबामा प्रशासन की नीति की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसे अमेरिकी राजनीति में असाधारण घटना माना गया। हालांकि इन मतभेदों के बावजूद ओबामा प्रशासन ने इजरायल को रिकॉर्ड सैन्य सहायता पैकेज भी मंजूर किया था।

चार्ल्स पर्सी: अक्सर दिया जाने वाला उदाहरण

Charles H. Percy का नाम अक्सर उन नेताओं में लिया जाता है जिन्होंने इजरायल को मिलने वाली अमेरिकी सहायता पर सवाल उठाए थे। 1984 के चुनाव में उनकी हार को कई विश्लेषक इजरायल समर्थक राजनीतिक नेटवर्क की ताकत के उदाहरण के रूप में देखते हैं। हालांकि उनकी हार के पीछे स्थानीय राजनीतिक और अन्य चुनावी कारण भी मौजूद थे।

अमेरिकी राजनीति में इजरायल का प्रभाव क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में चुनाव बेहद महंगे होते हैं और चुनावी फंडिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इजरायल समर्थक समूह, राजनीतिक एक्शन कमेटियां (PACs) और सुपर PACs कई चुनावों में सक्रिय रहते हैं। यही वजह है कि इजरायल से जुड़े मुद्दों पर नेताओं के बयानों और नीतियों का चुनावी असर भी देखने को मिलता है। हालांकि यह भी सच है कि अमेरिकी विदेश नीति केवल किसी एक लॉबी से तय नहीं होती। राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक हित, मध्य पूर्व की राजनीति, रक्षा सहयोग और घरेलू वोट बैंक जैसे कई कारक भी फैसलों को प्रभावित करते हैं।

क्या हर राजनीतिक हार के पीछे इजरायल होता है?

इस सवाल का जवाब ‘नहीं’ है। इतिहास बताता है कि चुनावी हार के पीछे अक्सर कई कारण होते हैं—आर्थिक स्थिति, घरेलू मुद्दे, नेतृत्व क्षमता, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और जनमत। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इजरायल अमेरिका की राजनीति में एक संवेदनशील और प्रभावशाली विषय रहा है। इसी कारण कई राजनीतिक विश्लेषक इसे अमेरिकी राजनीति का “थर्ड रेल” यानी ऐसा मुद्दा मानते हैं, जिसे छूना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है। यही वजह है कि इजरायल से जुड़े सवाल आज भी अमेरिकी चुनावों, कांग्रेस और व्हाइट हाउस की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

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