मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी ने बनाया नया रिकॉर्ड, 100 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक उपार्जन

farmers in wheat procurement

मध्यप्रदेश में इस वर्ष गेहूं खरीदी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश ने 100 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के मामले में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

13 लाख 41 हजार किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया गेहूं

कोविड काल को छोड़ पिछले 10 वर्षों में सबसे ज्यादा उपार्जन

किसानों के खातों में पहुंची 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि

लघु और सीमांत किसानों को खरीदी प्रक्रिया में दी गई प्राथमिकता

तौल, परिवहन और भंडारण के लिए किए गए विशेष प्रबंध

देश में सबसे ज्यादा किसानों से खरीदी

मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार इस वर्ष प्रदेश में 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदा गया। किसानों की संख्या के लिहाज से Madhya Pradesh देश में पहले स्थान पर रहा, जबकि कुल गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया। अधिकारियों का कहना है कि कोविड-19 अवधि को छोड़ दें तो पिछले दस वर्षों में यह समर्थन मूल्य पर सबसे बड़ा गेहूं उपार्जन अभियान रहा है।

लघु और सीमांत किसानों को प्राथमिकता

मध्यप्रदेश सरकार ने इस बार लघु और सीमांत किसानों को खरीदी प्रक्रिया में प्राथमिकता दी। कुल 8 लाख 9 हजार 990 छोटे और सीमांत किसानों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा गया। राज्य सरकार का कहना है कि छोटे किसानों को पहले स्लॉट और त्वरित तौल सुविधा देकर उनकी उपज समय पर खरीदी गई, ताकि उन्हें ज्यादा इंतजार न करना पड़े।

किसानों को मिला रिकॉर्ड भुगतान

खरीदी के साथ किसानों को भुगतान प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की गई। सरकार के मुताबिक अब तक किसानों के खातों में ₹23,708 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। इस वर्ष किसानों से ₹2585 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा ₹40 प्रति क्विंटल बोनस मिलाकर कुल ₹2625 प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा गया। डीबीटी प्रणाली के जरिए भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा गया।

खरीदी केंद्रों की लगातार मॉनिटरिंग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  ने स्वयं कई खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और किसानों के लिए पेयजल व छाया जैसी सुविधाओं की समीक्षा की गई। सरकार ने उन किसानों को राहत देते हुए खरीदी अवधि भी बढ़ाई, जिन्होंने स्लॉट बुक कराए थे। पहले 23 मई तक निर्धारित अवधि को बढ़ाकर 28 मई तक किया गया।

परिवहन और भंडारण की मजबूत व्यवस्था

सरकार के अनुसार खरीदे गए गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है, जो कुल उपार्जन का लगभग 93 प्रतिशत है। खरीदी केंद्रों पर बारदाना, तौल कांटे, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, हम्माल, सिलाई मशीन और कंप्यूटर जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। किसानों की सुविधा के लिए तौल पर्ची जारी करने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया, जबकि भुगतान संबंधी कार्य आधी रात तक संचालित किए गए।

भोपाल और उज्जैन आगे

संभागवार आंकड़ों के अनुसार Bhopal संभाग में सबसे अधिक 28 लाख 47 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदा गया। इसके बाद Ujjain संभाग में 22 लाख 84 हजार मीट्रिक टन और Jabalpur संभाग में 12 लाख 73 हजार मीट्रिक टन से अधिक उपार्जन दर्ज किया गया। इसके अलावा Indore, Sagar, Rewa और Narmadapuram संभागों में भी बड़े स्तर पर खरीदी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड गेहूं खरीदी और समय पर भुगतान से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। किसानों के हाथ में नकदी आने से कृषि निवेश, ग्रामीण व्यापार और उपभोग गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना है। सरकार का दावा है कि पारदर्शी खरीद प्रणाली और किसानों के हित में किए गए प्रबंधों ने प्रदेश में समर्थन मूल्य व्यवस्था पर किसानों का भरोसा और मजबूत किया है।

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