EXCLUSIVE : बारूदी सुरंग में गंवाया पैर, नहीं हारा हौसला: नागालैंड के होकाटो सेमा बने दुनिया के नंबर-1 पैरा शॉटपुट खिलाड़ी

Paris Paralympics

भारतीय सेना के सूबेदार होकाटो होटोजे सेमा ने रचा इतिहास। 2002 में सैन्य अभियान के दौरान बारूदी सुरंग विस्फोट में खोया बायां पैर, अब वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स रैंकिंग में पुरुषों की शॉटपुट F57 स्पर्धा में बने विश्व नंबर-1। पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद एक और बड़ी उपलब्धि।

जंग के मैदान से विश्व नंबर-1 बनने तक का सफर

भारत के लिए गर्व की खबर नागालैंड से आई है। भारतीय सेना के सूबेदार होकाटो होटोजे सेमा ने विश्व पैरा एथलेटिक्स में नया इतिहास रचते हुए पुरुषों की शॉटपुट F57 स्पर्धा में दुनिया की नंबर-1 रैंकिंग हासिल कर ली है। ताजा वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंचकर उन्होंने न केवल देश का मान बढ़ाया है, बल्कि यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

2002 में बारूदी सुरंग विस्फोट में गंवाया था पैर

होकाटो सेमा की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि अदम्य साहस और जज्बे की मिसाल है। वर्ष 2002 में सैन्य अभियान के दौरान बारूदी सुरंग (Landmine) विस्फोट में उन्होंने अपना बायां पैर खो दिया था। यह हादसा किसी भी व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह बदल सक ता था, लेकिन सेमा ने हार मानने के बजाय अपने जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया। उन्होंने पैरा खेलों को अपनाया और कठिन मेहनत के दम पर खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल कर लिया।

पेरिस पैरालंपिक के कांस्य पदक से मिली नई पहचान

होकाटो सेमा ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में पुरुषों की शॉटपुट F57 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का तिरंगा बुलंद किया था। यह पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं था, बल्कि उन सभी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बना, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। अब विश्व नंबर-1 बनने के साथ उन्होंने अपने करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

सेना से खेल तक, सम्मानों की लंबी सूची

होकाटो सेमा केवल एक सफल पैरा एथलीट ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के सम्मानित अधिकारी भी हैं। वे पहले पैरालंपियन हैं जिन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (Ati Vishisht Seva Medal) से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हें खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार भी मिल चुका है। ये सम्मान उनके अनुशासन, समर्पण और देश सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बने होकाटो सेमा

नागालैंड के एक सैनिक से विश्व के नंबर-1 पैरा शॉटपुट खिलाड़ी बनने तक का सफर करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है। जहां एक ओर उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना पैर खोया, वहीं दूसरी ओर खेल के मैदान में अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से पूरी दुनिया को दिखाहै।

भारत के लिए गर्व का पल

होकाटो होटोजे सेमा की यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की क्षमता का प्रमाण है। उनका सफर यह संदेश देता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी उस व्यक्ति को नहीं रोक सकतीं, जिसके भीतर देश के लिए कुछ कर दिखाने का जुनून हो।जंग के मैदान से विश्व रैंकिंग के शिखर तक पहुंचने वाले होकाटो सेमा आज साहस, संघर्ष और सफलता की जीवंत मिसाल बन चुके हैं।

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