EXCLUSIVE: ‘ग्लास स्किन’ का ग्लैमर या स्किन के लिए खतरा? कोरियन ब्यूटी ट्रेंड अपनाने से पहले जानिए पूरी सच्चाई

glamour of glass skin
सोशल मीडिया खोलते ही एक शब्द सबसे ज्यादा दिखाई देता है—“कोरियन ग्लास स्किन”। चमकदार, बेदाग, शीशे जैसी त्वचा पाने का सपना अब सिर्फ साउथ कोरिया तक सीमित नहीं रहा। भारत में लाखों युवा और महिलाएं भी इसी लुक के पीछे भाग रहे हैं। महंगे K-Beauty प्रोडक्ट्स, 10-स्टेप स्किनकेयर रूटीन और वायरल वीडियो देखकर लोग बिना सोचे-समझे इन्हें अपनाने लगे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर चमकती त्वचा हेल्दी भी होती है? क्या जो रूटीन कोरियन लोगों के लिए बना है, वही भारतीय त्वचा के लिए भी सही है? विशेषज्ञों का जवाब है—नहीं।
हर चमकती स्किन हेल्दी नहीं होती
 इंडियन स्किन पर क्यों भारी पड़ता ट्रेंड
 सोशल मीडिया बना ब्यूटी का दबाव
 ग्लास स्किन के पीछे छिपे खतरे
 अपनी स्किन के हिसाब से चुनें रूटीन

क्यों वायरल हुआ ‘ग्लास स्किन’ ट्रेंड?

कोरियन ब्यूटी इंडस्ट्री ने पूरी दुनिया में एक नया ब्यूटी स्टैंडर्ड बना दिया है।

ग्लास स्किन यानी—

सोशल मीडिया फिल्टर और हाई-डेफिनेशन कैमरों ने इस ट्रेंड को और भी लोकप्रिय बना दिया। लेकिन यह तस्वीर पूरी सच्चाई नहीं दिखाती। यहीं सबसे बड़ी गलती होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हर देश की त्वचा वहां के मौसम, जेनेटिक्स और जीवनशैली के अनुसार अलग होती है।

भारतीय त्वचा की खासियत

कोरियन त्वचा

यही कारण है कि एक ही प्रोडक्ट दोनों देशों में समान परिणाम नहीं देता।

ग्लास स्किन की कीमत कहीं आपकी स्किन तो नहीं?

डर्मेटोलॉजिस्ट बताते हैं कि बिना जरूरत कई एक्टिव इंग्रीडिएंट्स को एक साथ लगाने से त्वचा का प्राकृतिक सुरक्षा कवच (Skin Barrier) कमजोर हो सकता है।

इसके बाद शुरू होती हैं समस्याएं ● लालपन ● खुजली ● एलर्जी ● दाने ● मुंहासे ● इपरपिग्मेंटेशन ● अत्यधिक ड्राइनेस कई लोग सिर्फ सोशल मीडिया देखकर बिना डॉक्टर की सलाह के एसिड, एक्टिव सीरम और एक्सफोलिएंट्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है।

क्या सचमुच ‘पोरलेस’ स्किन संभव है?

विशेषज्ञ साफ कहते हैं नहीं। हर इंसान की त्वचा में पोर्स होते हैं। ये त्वचा का प्राकृतिक हिस्सा हैं। सोशल मीडिया पर दिखने वाली “बिना पोर्स वाली स्किन” अक्सर कैमरा फिल्टर, प्रोफेशनल लाइटिंग और एडिटिंग का नतीजा होती है। यानी जिस चेहरे को देखकर लोग खुद को कमतर समझ रहे हैं, वह कई बार वास्तविक होता ही नहीं।

मानसिक सेहत पर भी पड़ रहा असर

यह ट्रेंड सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं है। अब इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है। कई किशोरियां और युवा महिलाएं लगातार सोशल मीडिया पर “परफेक्ट फेस” देखकर अपने चेहरे से असंतुष्ट रहने लगी हैं। वे हर छोटे दाग को बड़ी समस्या समझने लगती हैं। मनोवैज्ञानिक इसे Body Dysmorphia यानी शरीर या चेहरे को लेकर अत्यधिक असंतोष की मानसिक स्थिति से जोड़ते हैं। ऐसे लोग बार-बार आईना देखते हैं, नई क्रीम खरीदते हैं और हमेशा अपने लुक को लेकर तनाव में रहते हैं।

रिसर्च क्या कहती है?

International Journal of Indian Psychology (2024) में प्रकाशित एक अध्ययन में दिल्ली-एनसीआर की 13 से 16 वर्ष की स्कूली छात्राओं पर सोशल मीडिया के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी स्टैंडर्ड्स और सोशल मीडिया के लगातार प्रभाव के कारण कई किशोरियों में अपने शरीर और त्वचा को लेकर नकारात्मक सोच विकसित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आत्मविश्वास पर भी असर डाल सकता है।

इन लोगों को सावधान रहने की अधिक जरूरत

अगर आपकी त्वचा ऑयली है कॉम्बिनेशन है जल्दी मुंहासे निकलते हैं संवेदनशील (Sensitive) है तो बिना सलाह के वायरल K-Beauty रूटीन अपनाना नुकसानदायक हो सकता है।

इन प्रोडक्ट्स से रखें दूरी

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय मौसम में ये उत्पाद हर किसी को सूट नहीं करते भारी बाम और क्रीम ये चेहरे को ज्यादा ऑयली बना सकती हैं। अल्ट्रा रिच स्लीपिंग मास्क रातभर लगे रहने से पोर्स बंद हो सकते हैं। हैवी क्लींजिंग बाम चेहरे पर अतिरिक्त ऑयल की परत छोड़ सकते हैं। भारतीय त्वचा के लिए क्या बेहतर है? डर्मेटोलॉजिस्ट सामान्य तौर पर हल्के और मौसम के अनुरूप उत्पाद चुनने की सलाह देते हैं। जैसे— वॉटर बेस्ड मॉइस्चराइजर  जेल क्रीम हल्के लोशन नियासिनामाइड विटामिन-सी  राइस वॉटर आधारित उत्पाद  सनस्क्रीन अगर त्वचा संवेदनशील है तो किसी भी नए उत्पाद का पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है।

क्या 10-स्टेप स्किनकेयर जरूरी है?

बिल्कुल नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अधिकांश लोगों के लिए एक सरल स्किनकेयर रूटीन पर्याप्त होता है—

हर नए ट्रेंड को अपनाना जरूरी नहीं।

फिल्टर वाली दुनिया, असली चेहरा मत भूलिए

आज इंस्टाग्राम, टिकटॉक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले अधिकांश चेहरे—

का परिणाम होते हैं। उन्हें अपनी वास्तविक त्वचा से तुलना करना मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह

कोरियन ग्लास स्किन ट्रेंड देखने में आकर्षक जरूर लगता है, लेकिन हर चमकती त्वचा स्वस्थ हो, यह जरूरी नहीं।  रतीय त्वचा की जरूरतें, मौसम और बनावट कोरियन स्किन से अलग हैं। इसलिए किसी भी वायरल ब्यूटी ट्रेंड को आंख बंद करके अपनाने के बजाय अपनी त्वचा के प्रकार और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है। असली खूबसूरती शीशे जैसी चमक में नहीं, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और प्राकृतिक त्वचा में होती है
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