खादी से गांवों को मिली नई ताकत…मध्यप्रदेश में इन बुनकरों को मिला सहारा

Khadi gives villages

मध्यप्रदेश में खादी और ग्रामोद्योग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की दिशा में सरकार लगातार कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि खादी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “नए भारत की नई खादी” को नई पहचान मिली है और अब यह वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खादी एवं ग्रामोद्योग को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है। इसी दिशा में म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की योजनाएं गांवों में आर्थिक बदलाव का माध्यम बन रही हैं।

उन्होंने बताया कि बुनकर मुद्रा योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। वर्ष 2023-24 में 44 बुनकरों को 21.40 लाख रुपये, वर्ष 2024-25 में 147 बुनकरों को 231.80 लाख रुपये और वर्ष 2025-26 में 3 बुनकरों को 15.30 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। सरकार का उद्देश्य है कि पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक बाजार से जोड़कर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ और ‘गांव की ओर जाओ’ के विचारों को साकार करने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड गांवों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर रहा है। इससे न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि पारंपरिक कला और संस्कृति भी संरक्षित हो रही है।

“लोकल से ग्लोबल” की ओर बढ़ रही खादी

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Dilip Jaiswal ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “आत्मनिर्भर भारत”, “मेक इन इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों ने खादी एवं ग्रामोद्योग को नई दिशा दी है। अब स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं और ग्रामीण कारीगर मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से व्यक्तिगत बुनकरों, स्व-सहायता समूहों, हथकरघा संगठनों और सहकारी समितियों को 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को नई ऊर्जा मिल रही है।

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि बुनकरों की सामाजिक सुरक्षा को भी सरकार प्राथमिकता दे रही है। पिछले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना के तहत 616 बुनकरों का बीमा कराया गया है, जबकि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 840 बुनकर शामिल हुए हैं। प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना के अंतर्गत 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा तथा प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में मात्र 20 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है।

“विन्ध्या वैली” और “कबीरा” बन रहे गुणवत्ता की पहचान

मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अब केवल खादी वस्त्रों तक सीमित नहीं है। बोर्ड सूती, ऊनी, रेशमी और पॉलीवस्त्र खादी के साथ-साथ मसाले, हर्बल उत्पाद, साबुन और हस्तनिर्मित वस्तुओं के उत्पादन को भी बढ़ावा दे रहा है। इन उत्पादों के विपणन के लिए “विन्ध्या वैली” और “कबीरा” जैसे ब्रांड विकसित किए गए हैं, जो गुणवत्ता और परंपरा के प्रतीक बनते जा रहे हैं। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि “अपना हाथ – अपना साथ” अभियान के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और कारीगरों को तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जा रही है। इससे महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

नई वेबसाइट बनेगी डिजिटल सेतु

म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक ने कहा कि महात्मा गांधी के ग्रामोद्योग मॉडल से प्रेरित होकर बोर्ड ग्रामीण विकास को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने बताया कि बोर्ड की नई अंतरजाल वेबसाइट कारीगरों, उद्यमियों और ग्राहकों के बीच मजबूत डिजिटल सेतु का काम करेगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविरों, प्रदर्शनियों और विपणन कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीण कारीगरों को बेहतर बाजार मिलने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।

तीन वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां

प्रदेश सरकार का मानना है कि खादी और ग्रामोद्योग केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का सशक्त अभियान है।

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