कांग्रेस का प्रोटेस्ट पार्ट-2: काले कपड़ों में संसद पहुंचा विपक्ष, राहुल-प्रियंका ने संभाली कमान

Congress Protest Part 2 Opposition arrives at Parliament in black attire Rahul and Priyanka take the lead

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में सियासी टकराव अब नए दौर में पहुंच गया है। कांग्रेस ने अपने विरोध प्रदर्शन को दूसरा चरण देते हुए इस बार प्रतीकात्मक अंदाज में केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के कई सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और NEET परीक्षा में कथित धांधली, देशभर में पेपर लीक की घटनाओं तथा प्रदर्शनकारी छात्रों और विपक्षी सांसदों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने की।

NEET और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर बड़ा हमला

कांग्रेस का कहना है कि यह विरोध केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का सवाल है। पार्टी ने इसे “युवाओं के साथ न्याय” की लड़ाई बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

काले कपड़ों से दिया राजनीतिक संदेश

संसद परिसर में कांग्रेस और विपक्षी सांसदों का काले कपड़ों में पहुंचना पूरी तरह पूर्व निर्धारित रणनीति का हिस्सा था। काला परिधान पहनकर सांसदों ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का कहना है कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव और छात्रों के साथ हुए व्यवहार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रतिरोध है।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी संसद परिसर में लगातार विपक्षी सांसदों के साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी करते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।

NEET और पेपर लीक बना बड़ा मुद्दा

कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि NEET परीक्षा में अनियमितताओं और देशभर में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य संकट में डाल दिया है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के विश्वास को बहाल करने के लिए सरकार को पारदर्शी जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करने चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही खामियों के बावजूद सरकार समस्या की गंभीरता स्वीकार करने से बच रही है।

छात्रों पर कार्रवाई…सरकार पर निशाना

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर इसलिए संसद पहुंचे हैं क्योंकि छात्रों और सांसदों पर पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उनका कहना है कि सरकार को टकराव की राजनीति छोड़कर छात्रों से संवाद करना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें रोकने और दबाने की कोशिश की गई, जिससे युवाओं में असंतोष और बढ़ा है।

प्रमोद तिवारी ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान बिना पहचान वाले लोगों द्वारा हमला किया गया। तिवारी ने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष लोकतंत्र में इस तरह की घटनाओं पर चुप बैठ सकता है। उनका कहना है कि संसद जनता की आवाज उठाने का मंच है और विपक्ष छात्रों के हितों की लड़ाई जारी रखेगा।

संसद के भीतर और बाहर बढ़ेगा दबाव

केवल संसद परिसर तक घेराव करना कांग्रेस की रणनीतिक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने आने वाले दिनों में अब संसद में विभिन्न प्रक्रियाओं के जरिए भी एनडीए सरकार को घेरने की तैयारी शुरु कर दी है। विपक्ष की कोशिश है कि NEET, पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों पर व्यापक चर्चा कराई जाए। संसद के बाहर भी कांग्रेस छात्र संगठनों और सहयोगी दलों के साथ मिलकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है। विपक्ष का मानना है कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है।

सरकार-विपक्ष आमने-सामने

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और अनियमितताओं पर कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि विपक्ष सरकार के इन दावों से संतुष्ट नहीं है और लगातार जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक गर्माने के संकेत हैं। विपक्ष इसे युवाओं से जुड़ा सबसे बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार अपनी नीतियों का बचाव करने में जुटी है।

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