सेवा से संकल्प तक… मोदी के 25 साल के सफर को MP में जनभागीदारी से जोड़ने की तैयारी

From Service to Resolve Plans to link Modi 25 year journey with public participation in MP

मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू होने जा रहा ‘सेवा-संकल्प अभियान’ महज कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि सरकार, संगठन और समाज को एक साझा मंच पर लाने की बड़ी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान की समीक्षा करते हुए साफ किया है कि इसका केंद्र बिंदु सेवा, विकास और जनभागीदारी रहेगा। अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और इस दौरान प्रदेश के गांवों से लेकर शहरों तक कई स्तरों पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा-संकल्प अभियान’

दीप प्रज्ज्वलन से लेकर हितग्राही शिविरों तक होंगे बड़े आयोजन

1. दीपों से शुरू होगा अभियान, बनेगा जनभागीदारी का संदेश

अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगी। शाम 7 बजे उज्जैन के महाकाल महालोक सहित प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन से इसमें शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और सेवा के प्रति आभार से जोड़ा है। खास बात यह है कि सरकार अब इस आयोजन को केवल सरकारी कार्यक्रम न रखकर लाभार्थी परिवारों, संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी से बड़ा जन-अभियान बनाने की तैयारी में है।

यानी संदेश साफ है—विकास की योजनाओं के लाभार्थी ही इस अभियान के सबसे बड़े सहभागी बनें।

2. सेवा के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला-बाल विकास पर फोकस

अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे केवल राजनीतिक या प्रतीकात्मक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया है। स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में 17 सितंबर को रक्तदान शिविर होंगे। वहीं ‘मेरे सपनों का भारत’ के तहत स्कूल-कॉलेजों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी।

आंगनवाड़ियों में ‘आंगन मिलन सेवा’ के जरिए बच्चों और माताओं को पोषण, टीकाकरण, एनीमिया और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। इससे अभियान को तीन स्तरों पर जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है—  युवा, महिला और स्वास्थ्य। यानी सरकार की कोशिश है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन का आयोजन केवल राजनीतिक संदेश न बने, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने वाला अभियान दिखाई दे।

3. योजनाओं के लाभार्थियों को बनाया जाएगा ‘विकास का चेहरा’

‘सेवा की कहानी’ कार्यक्रम अभियान का एक अहम हिस्सा है। इसके तहत केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जिन हितग्राहियों का जीवन बदला है, उनके संदेश सामने लाए जाएंगे। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह रणनीति बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार की योजनाओं के आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन जब कोई लाभार्थी खुद अपनी कहानी बताता है तो सरकारी योजना का प्रभाव ज्यादा प्रत्यक्ष दिखाई देता है। यही कारण है कि सेवा-संकल्प अभियान में लाभार्थी सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज के संदेशवाहक भी बनेंगे। ‘सेवा सेतु’ के तहत विकासखंड और नगरीय निकाय स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे, जहां पात्र लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मौके पर ही देने की तैयारी है। इसे जनविश्वास अभियान से जोड़ना भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

4. सड़क से सोशल मीडिया तक… हर मोर्चे पर अभियान

अभियान का दायरा सिर्फ सरकारी कार्यालयों और शिविरों तक सीमित नहीं रहेगा। ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ के तहत सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटक होंगे। ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ विधानसभा क्षेत्रों में निकाली जाएगी।

वहीं वडनगर से वाराणसी सेवा यात्रा प्रदेश के सभी जिलों से होकर गुजरेगी। ‘सेवा के रंग-राष्ट्र के संग’ के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और अलीराजपुर में बड़े स्तर पर मानव रंगोली बनाई जाएगी। इसके साथ ही स्टार्टअप और नवाचार की दुनिया को जोड़ने के लिए ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ रखा गया है। सोशल मीडिया प्रभावशाली लोगों को प्रदेश के विभिन्न जिलों का भ्रमण कराने की योजना भी है। यानी अभियान की रणनीति पारंपरिक जनसंपर्क से लेकर युवा, तकनीक, नवाचार और डिजिटल मंचों तक फैली हुई है।

5. 25 साल, 25 कहानियां… विकास के राजनीतिक संदेश को धार

अभियान का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश ‘25 साल-25 कहानियां’ और ‘सुशासन सेवा संवाद’ जैसे कार्यक्रमों से निकल सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को केंद्र में रखकर केंद्र सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी। वहीं 17 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाले सुशासन सेवा संवाद में मध्यप्रदेश के पंच-सरपंचों की भागीदारी रखी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को केवल आयोजन कराने के निर्देश नहीं दिए गए, बल्कि समन्वय, मॉनीटरिंग और शत-प्रतिशत जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। यही इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा संकेत है।

सेवा के जरिए संगठन और सरकार के बीच मजबूत कड़ी

मध्यप्रदेश में 17 सितंबर से शुरू होने वाला सेवा-संकल्प अभियान एक महीने तक चलने वाला व्यापक जनसंपर्क और जनभागीदारी अभियान है। इसमें दीप प्रज्ज्वलन से लेकर रक्तदान, शिक्षा, महिला-बाल विकास, हितग्राही शिविर, यात्राएं, मानव रंगोली, स्टार्टअप और सुशासन संवाद तक अलग-अलग गतिविधियों को एक सूत्र में पिरोया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ‘विकास के दीपक का प्रकाश देशभर में फैल रहा है’ वाला संदेश इसी व्यापक राजनीतिक-सामाजिक नैरेटिव को सामने रखता है।

अब असली चुनौती आयोजन के आकार की नहीं, बल्कि जनभागीदारी को वास्तविक भागीदारी में बदलने की होगी। अगर सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, युवा, महिलाएं, विद्यार्थी, पंचायत प्रतिनिधि और सामाजिक संगठन इस अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ते हैं, तो सेवा-संकल्प अभियान मध्यप्रदेश में सरकार के विकास मॉडल को जनता के बीच ले जाने का बड़ा माध्यम बन सकता है।

Exit mobile version