लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को रोजगार से सीधे जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में अब केवल डिग्री देने के बजाय छात्रों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए उद्योगों और तकनीकी संस्थानों के बीच सीधा सहयोग बढ़ाया जा रहा है, ताकि पढ़ाई, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट को रोजगार बाजार की मांग के अनुसार बनाया जा सके।
- इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक में रोजगारोन्मुखी पढ़ाई पर जोर
- उद्योगों के सहयोग से तैयार होंगे नए पाठ्यक्रम
- 90 हजार छात्रों के लिए केंद्रीय प्लेसमेंट पोर्टल
- AI और क्वांटम कंप्यूटिंग में प्रशिक्षित होंगे शिक्षक
- तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की नई पहल
प्राविधिक शिक्षा विभाग ने तकनीकी संस्थानों में रिक्त शिक्षकों और अन्य पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था मजबूत हो सके। साथ ही छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के सहयोग से केंद्रीय प्लेसमेंट पोर्टल शुरू किया जा रहा है। इस पोर्टल पर अब तक 90 हजार से अधिक छात्र और 40 से ज्यादा कंपनियां पंजीकृत हो चुकी हैं।
सरकार तकनीकी पाठ्यक्रमों को भी बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप अपडेट कर रही है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र से बीटेक छात्रों को 18 अतिरिक्त उद्योग आधारित क्रेडिट कोर्स करने की सुविधा दी गई है। छात्र ये कोर्स उद्योगों के माध्यम से या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी कर सकेंगे, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
नई तकनीकों के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था विकसित करने के लिए शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, मेकाट्रॉनिक्स और अन्य उभरती तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे छात्रों को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रदान कर सकेंगे।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने विभागीय अधिकारियों को तकनीकी शिक्षा में व्यापक सुधार का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी से ही युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, प्रदेश को कुशल मानव संसाधन मिलेगा और उत्तर प्रदेश तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।