केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने राज्य के उत्तरी हिस्सों में अत्यधिक वर्षा की आशंका जताते हुए सीजन का पहला रेड अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। कई क्षेत्रों में तेज हवाओं और बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
मलप्पुरम से कासरगोड तक कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बढ़ा
भारतीय मौसम विभाग ने शनिवार के लिए मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया है। इनमें से तीन जिलों में रविवार को भी अत्यधिक बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा इडुक्की, त्रिशूर, एर्नाकुलम, कोट्टायम, पलक्कड़ और पथानामथिट्टा में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि अलाप्पुझा, कोल्लम और तिरुवनंतपुरम को येलो अलर्ट श्रेणी में रखा गया है।
तेज हवाओं और बारिश ने कई इलाकों में बढ़ाई परेशानी
मानसून के असर से राज्य के कई हिस्सों में पेड़ गिरने और जलभराव जैसी घटनाएं सामने आई हैं। कोझिकोड शहर में सुबह तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। लगातार बारिश के चलते पहाड़ी और नदी किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासनिक टीमें संभावित आपदाओं से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर हैं।
भूस्खलन और बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। भूस्खलन, मलबा खिसकने और अचानक बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में रहने वालों से सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों में शिफ्ट होने की सलाह दी गई है। नदी और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने को कहा गया है।
पर्यटन स्थलों और जल स्रोतों से दूर रहने की अपील
मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों को झरनों, नदियों, जलाशयों और पहाड़ी पर्यटन स्थलों की यात्रा फिलहाल टालने की सलाह दी है। भारी बारिश के दौरान तैराकी, मछली पकड़ने या नदी पार करने जैसी गतिविधियों से बचने को कहा गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
देश की अर्थव्यवस्था और खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है मानसून
केरल में मानसून की दस्तक भारत के चार महीने लंबे वर्षा सीजन की शुरुआत मानी जाती है। देश की बड़ी आबादी और कृषि क्षेत्र बारिश पर निर्भर हैं। भारत की लगभग 51 प्रतिशत खेती सीधे मानसूनी वर्षा पर आधारित है। ऐसे में मानसून की स्थिति न केवल किसानों की आय बल्कि खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करती है। यही वजह है कि पूरे देश की नजर मानसून की प्रगति पर बनी रहती है।