- 5,793 दिन तक चला भारत का सबसे लंबा अनशन
- फोर्स-फीडिंग बनी दुनिया की सबसे चर्चित मिसाल
नई दिल्ली/इंफुट डेस्क। शिक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लंबे भूख हड़ताल पर बैठे होने के बीच एक बार फिर भारत की सबसे लंबी भूख हड़ताल करने वाली इरोम शर्मिला चर्चा में हैं। उनकी तुलना इसलिए की जा रही है क्योंकि लंबे अनशन के दौरान सरकार ने उन्हें जीवित रखने के लिए वर्षों तक नाक में डाली गई फीडिंग ट्यूब के जरिए जबरन तरल आहार (Force Feeding) दिया था।
इरोम शर्मिला, जिन्हें ‘आयरन लेडी ऑफ मणिपुर’ कहा जाता है, ने 5 नवंबर 2000 को मणिपुर के मालोम में 10 नागरिकों की मौत के बाद सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका यह अनशन करीब 5,793 दिन (16 वर्ष) तक चला और 9 अगस्त 2016 को समाप्त हुआ। इस दौरान उन्होंने अपनी इच्छा से मुंह से भोजन का एक निवाला तक नहीं खाया।
तत्कालीन कानून के तहत आत्महत्या के प्रयास को अपराध माना जाता था, इसलिए पुलिस उन्हें बार-बार हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराती रही। डॉक्टरों ने उनकी नाक में ट्यूब डालकर तरल पोषण देना जारी रखा, जिससे उनका जीवन बचाया जा सका। इसे दुनिया के सबसे लंबे फोर्स-फीडिंग मामलों में गिना जाता है।
अनशन समाप्त करने के बाद इरोम शर्मिला ने राजनीति में प्रवेश किया और मणिपुर विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। वर्तमान में वह अपने पति डेसमंड कौटिन्हो के साथ बेंगलुरु में रहती हैं और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती रहती हैं।
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता और फोर्स-फीडिंग की मांग के बीच इरोम शर्मिला का संघर्ष एक बार फिर इस बहस के केंद्र में आ गया है कि लंबे अनशन के दौरान राज्य की जिम्मेदारी और व्यक्ति के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।