Iran Israel war:इंटरनेट पर जंग का साया: होर्मुज में खतरा, दुनिया हो सकती है ठप

Iran Israel war

इंटरनेट पर जंग का साया: होर्मुज में खतरा, दुनिया हो सकती है ठप

Iran Israel war: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ तेल या सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन भी खतरे में आ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री रास्ते में बिछी इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

समुद्र के नीचे चलता है इंटरनेट

दुनिया का करीब 92% डेटा ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है।

  • ये केबल्स महाद्वीपों को जोड़ती हैं
  • इंटरनेट, बैंकिंग, क्लाउड और कम्युनिकेशन इन्हीं पर निर्भर है
  • किसी एक अहम रूट के प्रभावित होने से वैश्विक कनेक्टिविटी पर असर पड़ सकता है

यानी इंटरनेट का असली “हाईवे” समुद्र के नीचे है, जो अब खतरे में है।

होर्मुज क्यों है इतना संवेदनशील?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है।

  • मिडिल ईस्ट और एशिया-यूरोप को जोड़ता है
  • यहां से कई अहम इंटरनेट केबल्स गुजरती हैं
  • युद्ध या हमले की स्थिति में यह क्षेत्र सबसे पहले प्रभावित हो सकता है

अगर यहां केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो असर सीधे एशिया, यूरोप और अफ्रीका तक जाएगा।

जंग और साइबर खतरा

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के चलते यह खतरा और बढ़ गया है।

  • समुद्री हमलों या ड्रोन स्ट्राइक से केबल्स को नुकसान
  • साइबर हमलों के जरिए नेटवर्क बाधित करने की आशंका
  • रणनीतिक तौर पर इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है

यह “डिजिटल वॉरफेयर” का नया रूप माना जा रहा है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत भी इस नेटवर्क का बड़ा हिस्सा है।

संभावित असर:

  • इंटरनेट स्पीड में गिरावट
  • इंटरनेशनल कॉल और डेटा सेवाएं प्रभावित
  • बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं में बाधा

खासकर आईटी सेक्टर, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन कारोबार पर असर पड़ सकता है।

क्या पूरी दुनिया ठप हो जाएगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह इंटरनेट बंद होना मुश्किल है, क्योंकि:

  • कई वैकल्पिक केबल रूट मौजूद हैं
  • सैटेलाइट बैकअप सिस्टम भी उपलब्ध हैं

लेकिन स्पीड कम होना, नेटवर्क स्लो होना और सेवाओं में रुकावट तय मानी जा रही है अगर बड़ा नुकसान होता है।

मरम्मत भी आसान नहीं

समुद्र के अंदर केबल्स की मरम्मत एक जटिल प्रक्रिया है:

  • खास जहाजों और तकनीक की जरूरत
  • लग सकते हैं कई दिन…हफ्तों तक
  • युद्ध क्षेत्र में मरम्मत और भी मुश्किल

डिजिटल दुनिया पर मंडरा रहा खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने साफ कर दिया है कि आधुनिक दुनिया सिर्फ जमीन और आसमान नहीं, बल्कि समुद्र के नीचे की केबल्स पर भी निर्भर है। अगर ये लाइफलाइन प्रभावित होती है, तो असर सिर्फ इंटरनेट पर नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यानी जंग अब सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं—डिजिटल दुनिया भी इसकी चपेट में आ सकती है। 

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