Indian stock market भारतीय शेयर बाजार को बड़ा झटका, ग्लोबल रैंकिंग में फिसला भारत; दक्षिण कोरिया ने छोड़ा पीछे

वैश्विक शेयर बाजारों की दौड़ में भारत को बड़ा झटका लगा है। बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के आधार पर भारत अब दुनिया के शीर्ष पांच बाजारों से बाहर हो गया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार सातवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान ने तेज़ी से आगे बढ़ते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है। तकनीकी कंपनियों में जबरदस्त निवेश और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों की रैली ने एशियाई बाजारों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

दक्षिण कोरिया की तेज उड़ान ने भारत को वैश्विक रैंकिंग में पीछे धकेला

दक्षिण कोरिया की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर करीब 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। इस तेजी के पीछे दक्षिण कोरिया की बड़ी टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों का अहम योगदान माना जा रहा है। निवेशकों का रुझान AI और हाई-टेक सेक्टर की ओर बढ़ने से कोरियाई बाजार को बड़ा फायदा मिला है।

टेक्नोलॉजी कंपनियों की रैली ने कई देशों के बाजारों को नई ताकत दी

इस साल वैश्विक बाजारों में सबसे अधिक लाभ उन देशों को मिला है जिनकी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार तकनीकी कंपनियों पर आधारित हैं। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 2026 में अब तक लगभग 99 प्रतिशत उछाल दर्ज कर चुका है। वहीं ताइवान का प्रमुख सूचकांक करीब 55 प्रतिशत ऊपर है और अमेरिका का टेक्नोलॉजी केंद्रित नैस्डैक इंडेक्स 21 प्रतिशत की मजबूती दिखा चुका है। इन बाजारों में AI से जुड़ी कंपनियों ने निवेशकों को आकर्षित किया है।

भारतीय बाजार में कमजोरी के कई कारण एक साथ बने दबाव

दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार इस वर्ष करीब 11 प्रतिशत की गिरावट झेल चुका है। लगातार विदेशी निवेश की निकासी, वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दे रहा है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल, महंगाई और आर्थिक विकास दर पर सीधा प्रभाव डालती हैं।

मानसून और आर्थिक संकेतकों ने भी बढ़ाई निवेशकों की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की आशंका भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। कमजोर मानसून का असर कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और महंगाई पर पड़ सकता है। इसके साथ ही कंपनियों की कमाई और उपभोक्ता खर्च पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है। हालांकि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के नतीजे संतोषजनक रहे, लेकिन आने वाली तिमाहियों को लेकर बाजार सतर्क नजर आ रहा है।

पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। आने वाले महीनों में यही कारक भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करेंगे।

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