पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान की खाड़ी में भारतीय क्रू वाले जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों ने नई चिंता पैदा कर दी है। बीते चार दिनों में तीन अलग-अलग जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर रुख अपनाया है। इन घटनाओं ने न केवल समुद्री सुरक्षा बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
एमटी स्टेबेलो पर हमले के बाद तीन भारतीयों की मौत से मचा हड़कंप
9 जून को ओमान की खाड़ी में एमटी स्टेबेलो नामक जहाज पर हुए हमले के बाद तीन भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत की पुष्टि हुई। मृतकों में हिमाचल प्रदेश के 23 वर्षीय डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजीनियर पी. सुरेश और इंजन फिटर शिवनंद चौरसिया शामिल हैं। हमले के बाद तीनों लापता हो गए थे। घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को तलब किया और अपना विरोध जताया।
दूसरे जहाज पर भी हमला, भारतीय क्रू को सुरक्षित निकाला गया
एमटी स्टेबेलो की घटना से पहले 8 जून को एमटी मैरीवेक्स नामक जहाज पर भी कार्रवाई हुई थी। इस जहाज पर 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि ओमान की कोस्टगार्ड और भारतीय एजेंसियों के समन्वय से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने यह संकेत दिया कि क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर असाधारण निगरानी और सैन्य दबाव बना हुआ है।
एमटी जलवीर पर हमला, समुद्र में उठता धुआं और SOS संदेश
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एमटी जलवीर नामक जहाज पर हमले की खबर सामने आई। महाराष्ट्र के डिगी पोर्ट से रवाना हुए इस जहाज में भी भारतीय क्रू मौजूद था। हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और कप्तान ने तत्काल SOS संदेश जारी किया। बाद में सामने आए वीडियो में सभी क्रू सदस्यों को सुरक्षित बताया गया, लेकिन हमले के पीछे किसका हाथ था, इसे लेकर अब भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच समुद्री मार्ग बना संघर्ष का केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बने हुए हैं। एक ओर अमेरिका की नौसैनिक मौजूदगी बढ़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर ईरान भी इस क्षेत्र पर अपनी निगरानी और नियंत्रण को लेकर लगातार दावे कर रहा है। ऐसे हालात में यहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाज सबसे अधिक जोखिम का सामना कर रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
जी-7 सम्मेलन से पहले बढ़ा दबाव, भारत-अमेरिका रिश्तों पर नजर
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अगले सप्ताह 16 और 17 जून को फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शामिल होने की संभावना है। हालांकि दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन भारतीय जहाजों पर हुए हमलों के बाद दोनों देशों के संबंधों और रणनीतिक साझेदारी पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का बड़ा विषय बन सकता है।