IIT में सीट मिलने पर छोड़ा एडमिशन, फिर भी रोकी फीस! अब आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला

उच्च शिक्षा संस्थानों में फीस रिफंड को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता आयोग ने एक छात्रा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जयपुर स्थित एक प्रतिष्ठित संस्थान को पूरी फीस लौटाने का आदेश दिया है। छात्रा ने दूसरे संस्थान में बेहतर अवसर मिलने के बाद समय रहते अपना दाखिला वापस ले लिया था, लेकिन संस्थान ने फीस का बड़ा हिस्सा रोक लिया। अब आयोग ने इसे अनुचित मानते हुए न केवल फीस लौटाने बल्कि मुआवजा और कानूनी खर्च भी देने के निर्देश दिए हैं।

IIT मंडी में चयन होने के बाद छात्रा ने वापस लिया था दाखिला

मामला वर्ष 2023 का है, जब छात्रा ने जयपुर के एक प्रमुख तकनीकी संस्थान के MBA कार्यक्रम में प्रवेश लिया था। एडमिशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसने 94,315 रुपये फीस जमा कर दी थी। बाद में उसका चयन IIT मंडी में हो गया, जिसके चलते उसने 1 अगस्त 2023 को अपना दाखिला रद्द कराने और फीस वापस करने का आवेदन दिया। छात्रा का कहना था कि उसने शैक्षणिक सत्र शुरू होने और औपचारिक पंजीकरण से पहले ही प्रवेश छोड़ दिया था।

संस्थान ने अधिकांश फीस रोक ली, छात्रा पहुंची उपभोक्ता आयोग

छात्रा को उम्मीद थी कि नियमों के अनुसार उसे फीस वापस मिल जाएगी, लेकिन संस्थान ने केवल 15 हजार रुपये लौटाए और 79,315 रुपये अपने पास रख लिए। इसके बाद छात्रा ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत में कहा गया कि फीस रोकना संस्थान की नियम पुस्तिका और नियामक दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।

संस्थान ने कहा- हमारी आंतरिक नीति लागू होगी

संस्थान ने आयोग के सामने दलील दी कि वह एक विशेष श्रेणी का राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और उसकी अपनी प्रवेश एवं रिफंड नीति है। संस्थान का कहना था कि छात्रा ने निर्धारित समय सीमा के बाद प्रवेश वापस लिया था, इसलिए फीस वापसी संभव नहीं थी। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि सीट खाली रहने से संस्थान को आर्थिक नुकसान हुआ।

आयोग ने कहा- शिक्षा संस्थान मुनाफा कमाने का माध्यम नहीं

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि छात्रा ने न तो कक्षाएं अटेंड की थीं और न ही अंतिम पंजीकरण पूरा किया था। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जब किसी छात्र को वास्तविक शैक्षणिक सेवा प्रदान ही नहीं की गई, तो पूरी फीस रोकना उचित नहीं माना जा सकता। आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि उच्च शिक्षण संस्थान ज्ञान के केंद्र होते हैं, उन्हें व्यावसायिक लाभ कमाने वाले संस्थान की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए।

पूरी फीस लौटाने के साथ मुआवजा देने का भी आदेश

आयोग ने संस्थान को 94,315 रुपये की पूरी फीस 60 दिनों के भीतर लौटाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा छात्रा को मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 15 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो संस्थान को शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

यह फैसला उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो बेहतर अवसर मिलने पर प्रवेश वापस लेते हैं और फीस रिफंड को लेकर परेशानियों का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों को मजबूत करेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

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