Political Controversy: हामिद अंसारी के बयानों पर फिर विवाद, मुस्लिम असुरक्षा से हिंदू दक्षिणपंथ तक इन मुद्दों पर मचा सियासी घमासान

नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी लंबे समय से अपने बयानों को लेकर राजनीतिक चर्चा में रहे हैं। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए और उसके बाद भी उन्होंने धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यकों की स्थिति, राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी। उनके कुछ बयानों का समर्थन हुआ तो कई मौकों पर राजनीतिक दलों और दूसरे संगठनों ने उनके बयान पर सवाल भी उठाए।

2017 में मुस्लिमों में असुरक्षा का मुद्दा
2017 में उपराष्ट्रपति पद से विदाई के समय हामिद अंसारी ने देश में मुस्लिम समुदाय के बीच बेचैनी और असुरक्षा की भावना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि देश में ऐसा माहौल होना चाहिए जहां हर व्यक्ति को स्वीकार किए जाने का भरोसा मिले।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई थी। आलोचकों ने उनके बयान पर सवाल उठाए, जबकि उनके समर्थकों ने इसे संविधान में दिए गए समानता और बहुलता के सिद्धांतों से जोड़कर देखा।
राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर टिप्पणी

अंसारी ने एक अन्य मौके पर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को लेकर भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने राष्ट्रवाद के ऐसे रूप को लेकर चिंता जताई थी जिसमें असहमति के लिए जगह कम हो। उन्होंने भारत की बहुलतावादी परंपरा और संवैधानिक मूल्यों को महत्वपूर्ण बताया।
उनके इस बयान पर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। उनके आलोचकों और समर्थकों ने इसे अपने-अपने नजरिए से देखा।

RSS और हिंदू दक्षिणपंथ को लेकर बयान
अंसारी के बयानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू दक्षिणपंथ का मुद्दा भी कई बार सामने आया। 2026 में दिए गए एक बयान में उन्होंने भारत के सामने हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर चिंता जताई और जवाहरलाल नेहरू के विचारों का हवाला दिया।

बीजेपी ने उनके बयान की आलोचना की और इसे कांग्रेस की राजनीति से जोड़कर देखा। इसके बाद कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी अंसारी की टिप्पणी से दूरी बनाने की बात कही।
महमूद गजनवी को लेकर विवाद 2026 में महमूद गजनवी और भारत के इतिहास से जुड़े एक बयान को लेकर भी अंसारी चर्चा में आए। बीजेपी नेताओं ने उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इतिहास को इस तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले में इतिहास की व्याख्या और मध्यकालीन शासकों को देखने के तरीके को लेकर बहस सामने आई। यह विवाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना।

पाकिस्तान और ISI से जुड़े आरोप
2022 में पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा से जुड़े दावों के बाद अंसारी पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संबंध होने जैसे आरोप लगाए गए थे। अंसारी ने इन आरोपों को खारिज किया था। इस मामले में यह अंतर रखना जरूरी है कि ये आरोप थे, जिन्हें अंसारी ने स्वीकार नहीं किया। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा। अंसारी के बयानों पर लगातार क्यों होती है बहस? हामिद अंसारी के विवादित बयानों को देखें तो ज्यादातर मामले धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यक अधिकार, राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़े रहे हैं। उनके समर्थक इन टिप्पणियों को संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक बहुलता से जोड़ते हैं, जबकि आलोचक इन पर राजनीतिक और वैचारिक सवाल उठाते रहे हैं। यही वजह है कि उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के कई साल बाद भी हामिद अंसारी के पुराने और नए बयान समय-समय पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते रहते हैं।

 

 

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