उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। बीजेपी ने मिशन-2027 की रणनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को खास तवज्जो दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मेरठ और सहारनपुर के दौरे पर हैं। सवाल सिर्फ बैठकों का नहीं, बल्कि पश्चिम की सियासी जमीन पर संगठन को फिर से चुनावी मोड में लाने का है। बूथ से लेकर शक्ति केंद्र तक समीक्षा और जाट, गुर्जर, किसान समेत स्थानीय सामाजिक समीकरणों पर फीडबैक इस दौरे के अहम हिस्से हैं। इधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी हर विधानसभा सीट पर 27 हजार वोट बढ़ाने की रणनीति बनाई है।
पश्चिम में किसका पलड़ा भारी?
71 सीटों पर बीजेपी का मंथन
54 से 41 अब वापसी की तैयारी!
नितिन नबीन का पश्चिमी यूपी मिशन
बूथ-बूथ बीजेपी की पैनी नजर
जाट-गुर्जर समीकरण पर बड़ा फोकस
किसान फैक्टर पर बीजेपी का मंथन
अखिलेश का 27 हजार वाला दांव
वोट बढ़ाने की होड़, मिशन-2027
पश्चिम से तय होगी 2027 की दिशा
उत्तर प्रदेश में BJP की सीटों का गणित
यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं।
2014 में बीजेपी ने लोकसभा की 71 सीटें जीतीं।
2019 में बीजेपी ने 62 सीटें जीतीं, 9 सीटों का घाटा।
2024 में बीजेपी ने 33 सीटें जीतीं, 29 सीटों का घाटा।
विधानसभा सीटों का गणित
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं।
2017 के चुनाव में बीजेपी को 312 सीटें मिलीं।
2022 में बीजेपी ने 255 सीटें जीतीं।
2022 में बीजेपी को 57 सीटों का नुकसान हुआ।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने मिशन-2027 का संगठनात्मक पहिया तेज कर दिया है। नितिन नबीन दो दिन मेरठ और सहारनपुर में रणनीति पर मंथन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में सांसदों, विधायकों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। यानी संदेश साफ है। 2027 की लड़ाई के लिए पार्टी बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को परखना चाहती है।
पश्चिमी यूपी बीजेपी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां 71 सीटों में 54 पर जीत दर्ज की थी। जबकि 2022 में उसका आंकड़ा 41 रह गया। अब पार्टी संगठन इन सीटों पर जमीनी स्थिति का फीडबैक जुटाने में जुटा है। पश्चिमी यूपी में चुनावी गणित सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। यहां किसान, गन्ना, रोजगार, कानून-व्यवस्था और जातीय समीकरण जैसे मुद्दे चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं। बीजेपी की बैठकों में जाट और गुर्जर समीकरण समेत स्थानीय सामाजिक समीकरणों पर फीडबैक लिए जाने की बात सामने आई है। दूसरी तरफ पार्टी की प्रदेश स्तरीय रणनीति में बूथ सशक्तिकरण, सामाजिक संतुलन, लाभार्थी संपर्क, सरकार के कामकाज का प्रचार और विपक्ष के नैरेटिव का जवाब जैसे बिंदु शामिल बताए गए हैं।
इधर समाजवादी पार्टी भी चुनावी जमावट में जुट गई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “सभी प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों और पदाधिकारियों के साथ बैठक की। हमने फैसला किया है कि 2027 में हर विधानसभा में 27 हजार वोट बढ़ाने का काम करेंगे। ऐसा भी कह सकते हैं कि हर विधानसभा में भाजपा के 27 हजार वोट कम करने का काम करेंगे।”
समाजवादी पार्टी प्रमुख की इस रणनीति पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने तंज कसा है। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी को हर सीट पर 25 हजार वोट ही मिल जाएं तो बड़ी बात है।” पश्चिमी यूपी में बीजेपी की चुनौती और रणनीति दोनों साफ दिखाई दे रही हैं। एक तरफ 71 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने की कवायद है, तो दूसरी तरफ किसान और सामाजिक समीकरणों जैसे स्थानीय मुद्दों पर फीडबैक जुटाने की कोशिश। अब नितिन नबीन के इस दौरे के बाद संगठनात्मक स्तर पर कौन से बदलाव और सीटवार रणनीति सामने आती है, यह मिशन-2027 की दिशा को और स्पष्ट करेगा।