सहारनपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का दौरा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन नबीन सहारनपुर पहुंचे , जहां पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक के अलावा प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों के साथ संगठनात्मक बैठक है। पार्टी के मुताबिक फोकस जमीनी संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों की समीक्षा पर है।
- पश्चिमी यूपी में बीजेपी का मिशन-2027
- सहारनपुर में नबीन की मैराथन बैठकें
- पूर्व सांसद-विधायकों से संवाद
- संगठन की जमीनी तैयारियों का लेंगे फीडबैक
- 71 सीटों वाले पश्चिमी यूपी पर नजर
- 2024 के झटके से 2027 की तैयारी
- सामाजिक समीकरण और बूथ रणनीति पर मंथन
- सहारनपुर से बीजेपी का संगठनात्मक रीसेट
2024 के नतीजों से 2027 की रणनीति
पश्चिमी यूपी बीजेपी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव में सहारनपुर, कैराना और मुजफ्फरनगर तीनों लोकसभा सीटों पर विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार जीते थे। सहारनपुर में कांग्रेस के इमरान मसूद ने बीजेपी के राघव लखनपाल को 64,542 वोटों से हराया था। अब बीजेपी 2027 से पहले इसी क्षेत्र में संगठन की कमजोर कड़ियों की पहचान और सुधार पर जोर देती दिख रही है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी पश्चिमी यूपी की 71 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक फोकस बढ़ा रही है।
नबीन की बैठकों में क्या एजेंडा?
सहारनपुर में होने वाली बैठकों को तीन स्तरों पर देखा जा सकता है।
पहला — संगठन। बूथ स्तर तक पार्टी की सक्रियता, पदाधिकारियों की भूमिका और स्थानीय संगठन की स्थिति।
दूसरा — सामाजिक समीकरण। पश्चिमी यूपी में जाट, गुर्जर, मुस्लिम, दलित और अन्य सामाजिक समूहों के बीच बदलते राजनीतिक समीकरण को समझना।
तीसरा — 2027 की चुनावी तैयारी। स्थानीय मुद्दों, संभावित चुनौतियों और विधानसभा सीटवार संगठन की स्थिति पर फीडबैक लेना।
यानी मेरठ से शुरू हुआ नितिन नबीन का पश्चिमी यूपी दौरा महज संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि 2027 के लिए बीजेपी की जमीनी तैयारी को परखने की कवायद के रूप में सामने आ रहा है। सहारनपुर से उठता सवाल यही है—2024 में पश्चिमी यूपी से मिले सियासी संदेश को बीजेपी 2027 की रणनीति में किस तरह शामिल करती है?