दुनिया में बढ़ती गर्मी को लेकर एक बार फिर बड़ा खतरे का संकेत सामने आया है। विश्व मौसम संगठन (WMO) और ब्रिटेन के मौसम विभाग की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले पांच साल दुनिया के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 से 2030 के बीच वैश्विक तापमान लगातार रिकॉर्ड स्तर के करीब बना रहेगा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में हीटवेव, सूखा, बाढ़ और जलवायु आपदाएं और ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं।
2026 से 2030 के बीच लगातार बढ़ सकती है धरती की गर्मी
नई रिपोर्ट के अनुसार अगले पांच वर्षों में पृथ्वी का औसत तापमान 1850-1900 के स्तर से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने का अनुमान है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह संकेत बेहद गंभीर हैं क्योंकि दुनिया पहले ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का सामना कर रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि कई देशों में गर्म हवाओं, जंगल की आग और असामान्य मौसम की घटनाओं में तेजी आ सकती है।
एल नीनो का असर 2027 को बना सकता है सबसे गर्म साल
जलवायु विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि 2026 के अंत तक एल नीनो सक्रिय हो सकता है। इसके कारण 2027 और 2028 में तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ. लियोन हरमैनसन के मुताबिक एल नीनो समुद्री सतह को गर्म करता है, जिससे पूरी दुनिया के मौसम पर असर पड़ता है। इससे एशिया, यूरोप और अमेरिका समेत कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी बढ़ सकती है।
आर्कटिक में तेजी से पिघल रही बर्फ बढ़ा रही चिंता
रिपोर्ट में आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भी बड़ी चेतावनी दी गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ध्रुवीय इलाकों में तापमान दुनिया के औसत से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। बर्फ के लगातार पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ सकता है और मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्सों में अचानक बाढ़ और भारी बारिश जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
2024 का रिकॉर्ड टूटने की 86 प्रतिशत संभावना
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक साल ऐसा होगा जो 2024 को पीछे छोड़ते हुए अब तक का सबसे गर्म वर्ष बन जाएगा। रिपोर्ट में 86 प्रतिशत संभावना जताई गई है कि नया रिकॉर्ड बन सकता है। 2024 में वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से लगभग 1.55 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था।
पेरिस समझौते के लक्ष्य पर बढ़ा दबाव, दुनिया के सामने बड़ी चुनौती
पेरिस जलवायु समझौते के तहत दुनिया के देशों ने तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था। लेकिन मौजूदा हालात इस लक्ष्य को मुश्किल बनाते दिख रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कार्बन उत्सर्जन पर तेजी से रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में जलवायु संकट और गहरा सकता है, जिसका असर खेती, पानी और मानव जीवन पर पड़ेगा।