Ahmedabad से सामने आई इस बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के निकोल इलाके में एक रिहायशी मकान के अंदर लंबे समय से नकली घी बनाने का धंधा चल रहा था, जिसका खुलासा नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में हुआ। मौके से भारी मात्रा में मिलावटी घी बरामद कर यूनिट को तुरंत सील कर दिया गया।
रिहायशी इलाके में छिपाकर चलाया जा रहा था नकली घी का पूरा नेटवर्क, आसपास के लोगों को भनक तक नहीं लगी
जांच में सामने आया कि यह अवैध यूनिट एक सामान्य घर के भीतर संचालित हो रही थी, जहां बाहर से देखने पर कोई शक नहीं होता था। अंदर बड़े स्तर पर घी बनाने और पैकिंग का काम किया जा रहा था। स्थानीय लोगों को भी इस गतिविधि की जानकारी नहीं थी, जिससे यह कारोबार काफी समय से बिना रुकावट के चलता रहा।
केमिकल और सस्ते तेल से तैयार किया जा रहा था नकली घी, स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था यह खेल
अधिकारियों के मुताबिक, असली घी की जगह सस्ते तेल और केमिकल मिलाकर तैयार किया गया पदार्थ “घी” के नाम पर पैक किया जा रहा था। इस प्रक्रिया में गुणवत्ता और स्वच्छता के किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा था। अगर यह उत्पाद बाजार में पहुंचता, तो लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता था।
छापेमारी में 500 किलो नकली घी और लाखों का सामान बरामद, मशीनें और पैकेजिंग सामग्री भी जब्त
कार्रवाई के दौरान करीब 500 किलो मिलावटी घी जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 1.60 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा खाली डिब्बे, लेबल, पैकिंग मशीन और अन्य उपकरण भी मौके से बरामद हुए। पूरी यूनिट को सील कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
बिना लाइसेंस और नियमों के चल रहा था कारोबार, सख्त कार्रवाई की तैयारी में विभाग
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि यूनिट बिना वैध लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रही थी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह नकली घी शहर के किन-किन इलाकों में सप्लाई किया जा चुका है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले, अब पूरे नेटवर्क की जांच पर जोर
यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की मिलावटखोरी सामने आई हो। इससे पहले भी गुजरात के अन्य शहरों में ऐसी फैक्ट्रियों का खुलासा हो चुका है। अब प्रशासन इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गया है, ताकि इस अवैध धंधे की जड़ तक पहुंचा जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
निष्कर्ष: मिलावटखोरी पर बड़ी चोट, लेकिन सतर्क रहना जरूरी
इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का खतरा अभी भी बना हुआ है। ऐसे में उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की जरूरत है और केवल भरोसेमंद ब्रांड या स्रोत से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए।