महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने ऐसा बयान दिया, जिसने देशभर में नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने लोगों से चार संतानें पैदा करने और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए समर्पित करने की अपील की। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।
धर्मसभा के मंच से दिया गया बयान और RSS की भूमिका पर जोर
नागपुर में भारत दुर्गा शक्तिस्थल और धर्मसभा के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान शास्त्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जब देश पर संकट आता है, तब आम लोग अपनी सुरक्षा में लग जाते हैं, लेकिन संघ के स्वयंसेवक बिना किसी स्वार्थ के राहत और सेवा कार्यों में जुट जाते हैं। उनके मुताबिक, देश को ऐसे ही समर्पित युवाओं की जरूरत है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें।
बड़े नेताओं की मौजूदगी में बढ़ा बयान का राजनीतिक महत्व
इस कार्यक्रम में मोहन भागवत, देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी जैसे प्रमुख नेता भी मंच पर मौजूद थे। शास्त्री ने अपने भाषण में मोहन भागवत के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में देश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने ‘अखंड भारत’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए इसे सांस्कृतिक और वैचारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
बच्चों को राष्ट्र और धर्म सेवा के लिए तैयार करने की अपील
अपने संबोधन में शास्त्री ने यह भी कहा कि केवल पढ़ाई-लिखाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को धर्म और राष्ट्र सेवा के संस्कार भी देने चाहिए। उनका मानना है कि समाज को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो अपनी संस्कृति और देश के लिए काम करने का जज्बा रखते हों। इसी संदर्भ में उन्होंने चार बच्चों की बात रखते हुए एक को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित करने की सलाह दी।
विवाद और प्रतिक्रियाओं का दौर, निजी स्वतंत्रता पर उठे सवाल
हालांकि, शास्त्री के इस बयान को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों में मतभेद देखने को मिल रहे हैं। कुछ लोग इसे राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणादायक बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जनसंख्या नीति के खिलाफ मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है। इससे पहले भी प्रयागराज में उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा और हिंदू एकता को लेकर बयान दिए थे, जो काफी चर्चा में रहे थे।