धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर विचार करने की सहमति जताई, जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें भोजशाला को मंदिर माना गया था। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की और स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले की रोजाना सुनवाई भी की जा सकती है।
भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति पर फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल भोजशाला परिसर के भीतर शुक्रवार की नमाज दोबारा शुरू करने की मांग पर कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि परिसर के निकट एक उपयुक्त खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां मुस्लिम समुदाय प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सके। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी बिना न्यायालय की अनुमति के किसी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन नहीं करने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देकर मुस्लिम पक्ष ने रखी अपनी दलील
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मई 2026 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में भोजशाला परिसर को मंदिर मानते हुए वर्ष 2003 की उस व्यवस्था को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत शुक्रवार को परिसर में नमाज की अनुमति दी जाती थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस स्थान पर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं और उन्हें नमाज का अधिकार मिलना चाहिए।
वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट बनी पूरे विवाद का अहम आधार
मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। हाई कोर्ट के निर्देश पर 11 मार्च 2024 को ASI ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू किया था, जो 22 मार्च से शुरू होकर 98 दिनों तक चला। इसके बाद एजेंसी ने 2,000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में दावा किया गया कि वर्तमान ढांचे से पहले वहां परमार काल का एक विशाल मंदिरनुमा निर्माण मौजूद था और बाद में उसी सामग्री का उपयोग कर वर्तमान संरचना तैयार की गई।
दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम, अंतिम फैसला अदालत के हाथ में
हिंदू पक्ष का कहना है कि सर्वेक्षण के दौरान मिले शिलालेख, मूर्तियां और सिक्के इस स्थान के मंदिर होने के प्रमाण हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष ने ASI की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया और कहा कि रिपोर्ट एकतरफा निष्कर्षों पर आधारित है। अब इस बहुचर्चित मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे आने वाले आदेशों पर निर्भर करेगा।