115 डॉलर का क्रूड, पेट्रोल-डीजल पर महंगाई की आहट!… कच्चा तेल 115 डॉलर पार, कब तक थमेगी कीमतों की रफ्तार?

Petrol and Diesel Prices
115 डॉलर का क्रूड, पेट्रोल-डीजल पर महंगाई की आहट!… कच्चा तेल 115 डॉलर पार, कब तक थमेगी कीमतों की रफ्तार?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आग, घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर। तेल कंपनियों पर बढ़ता दबाव, आम आदमी को महंगाई का डर।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बाद तेल बाजार में बढ़ी उथल-पुथल का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका बढ़ रही है। सवाल यह है कि जब कच्चा तेल महंगा हो रहा है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब तक स्थिर रहेंगी?
फिलहाल राहत की बात यह है कि तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। लेकिन यह राहत कितने दिन कायम रहेगी, इसे लेकर चिंता बढ़ने लगी है। देश के कई शहरों में पेट्रोल पहले ही 100 रुपये प्रति लीटर के पार है, जबकि कुछ शहरों में डीजल भी 100 रुपये के ऊपर बिक रहा है। ऐसे में कच्चे तेल की हर उछाल आम आदमी की जेब पर संभावित बोझ की चेतावनी दे रही है।
115 डॉलर का तेल, बढ़ती महंगाई की चिंता
कच्चे तेल की कीमतें भारत के लिए केवल ऊर्जा बाजार का मामला नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की अर्थव्यवस्था, परिवहन लागत और आम आदमी के घरेलू बजट से है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से तेल आयात का बिल बढ़ सकता है और विदेशी मुद्रा पर भी दबाव पड़ सकता है।
जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर दबाव बढ़ता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। तेल कंपनियों की लागत के साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर, कर, परिवहन खर्च और सरकार की नीतियां भी अंतिम कीमत को प्रभावित करती हैं।
यानी 115 डॉलर प्रति बैरल का स्तर चिंता बढ़ाने वाला जरूर है, लेकिन कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की घोषणा के बिना महंगे पेट्रोल-डीजल को लेकर कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।
भोपाल में पेट्रोल 114 रुपये के पार
देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। लखनऊ में पेट्रोल 101.89 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तस्वीर ज्यादा महंगी है। यहां पेट्रोल 114.57 रुपये और डीजल 99.64 रुपये प्रति लीटर है। बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये और डीजल 99.36 रुपये है। वहीं, जयपुर में पेट्रोल 112.69 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर पर है।
झारखंड की राजधानी रांची में पेट्रोल 105.26 रुपये और डीजल 100.49 रुपये प्रति लीटर है। यानी रांची में डीजल भी 100 रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।
दूसरी ओर, चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.51 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर है। इन आंकड़ों से साफ है कि अलग-अलग राज्यों में करों और अन्य स्थानीय कारकों के कारण ईंधन की कीमतों में बड़ा अंतर है।
पेट्रोल महंगा तो हर चीज पर असर
पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ने का खतरा रहता है। इसका असर सब्जियों, खाद्यान्न, दूध और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
किसानों के लिए डीजल सिंचाई और कृषि कार्यों का अहम साधन है। वहीं, परिवहन क्षेत्र में ईंधन की लागत बढ़ने से कारोबारियों का खर्च बढ़ सकता है। यदि यह बढ़ोतरी लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई का दबाव अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।
हालांकि, यह असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें कितने समय तक ऊंची बनी रहती हैं और तेल कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा स्वयं वहन करती हैं।
विश्लेषण: राहत कितने दिन, सबसे बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 115 डॉलर प्रति बैरल का कच्चा तेल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बनेगा? इसका जवाब फिलहाल निश्चित नहीं है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, कीमतें स्थिर रखने का फैसला आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत दे सकता है। लेकिन लंबे समय तक बढ़ी लागत का दबाव कंपनियों के लिए चुनौती बना रह सकता है।
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